प्रयागराज, 21 जनवरी 2026: प्रयागराज में चल रहे माघ मेले 2026 में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुए विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। मौनी अमावस्या (18 जनवरी) पर शाही स्नान के लिए उनकी पालकी/रथ को पुलिस ने रोका, जिसके बाद शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। स्वामी जी ने इसे अपमान बताते हुए ठंड में बिना अन्न-जल के धरना शुरू किया, जो अब तीन दिन से जारी है।

मेला प्राधिकरण ने 19-20 जनवरी को स्वामी जी को नोटिस जारी किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के 2022 के आदेश का हवाला देकर पूछा गया कि वे अपने शिविर के बोर्ड पर “शंकराचार्य” उपाधि कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि ज्योतिष पीठ के उत्तराधिकार का मामला अदालत में लंबित है और पट्टाभिषेक पर रोक है। नोटिस में 24 घंटे में जवाब मांगा गया। स्वामी जी ने जवाब भेज दिया है (8 पन्नों में, सुप्रीम कोर्ट के वकील के जरिए), जिसमें कहा गया कि आदेश में उपाधि पर स्पष्ट रोक नहीं है, और अन्य पीठों (जैसे पुरी) के शंकराचार्यों को अनुमति दी गई। उन्होंने प्रशासन पर सुप्रीम कोर्ट आदेश को तोड़-मरोड़ने का आरोप लगाया।
कांग्रेस का तीखा हमला
कांग्रेस ने इसे हिंदू धर्म पर सीधा हमला करार दिया। पार्टी के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भाजपा सरकार का घमंड चरम पर है—पहले मुसलमानों से कागज मांगते थे, अब हिंदू संत से। उन्होंने आरोप लगाया कि जब स्वामी जी भाजपा/मोदी सरकार की आलोचना (राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा, महाकुंभ व्यवस्था आदि) नहीं करते थे, तब वे शंकराचार्य थे, लेकिन अब नहीं। खेड़ा ने संविधान के अनुच्छेद 25-26 का उल्लंघन और 1954 के शिरूर मठ केस का हवाला दिया। उन्होंने पीएम मोदी और सीएम योगी के मौन पर सवाल उठाया और कहा कि हिंदू समाज इसे माफ नहीं करेगा।

प्रशासन का पक्ष
मेला प्राधिकरण का कहना है कि नियम और सुप्रीम कोर्ट आदेश सर्वोपरि हैं। कोई VIP व्यवस्था नहीं तोड़ी जा सकती, भीड़ नियंत्रण के लिए पालकी रोकी गई। नोटिस केवल बोर्ड पर उपाधि के इस्तेमाल पर है, स्नान रोकने का इरादा नहीं।
स्वामी जी का रुख
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि शंकराचार्य पद अन्य पीठों की मान्यता से तय होता है, न कि CM या प्रशासन से। उन्होंने लीगल एक्शन की चेतावनी दी और पूछा कि पुरी के दो शंकराचार्यों को शिविर क्यों अनुमति? धरना जारी है, और वे प्रोटोकॉल के साथ स्नान तक नहीं करेंगे।
रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

