केरल में मानसून की भीषण बाढ़ के बीच एक और वीरगाथा सामने आई है। 36 वर्षीय राजेश, जो तिरुवनंतपुरम के थेत्तिविला निवासी और एडवेंचर डिज़ास्टर सोसाइटी के सदस्य थे, ने 1 अगस्त को कन्नूर ज़िले के पुलिंगोम गांव में 61 वर्षीय बेनी को बचाने के लिए अपनी लाइफ़ जैकेट उतारकर उन्हें पहना दी। बुज़ुर्ग सुरक्षित बच गए, लेकिन राजेश तेज़ बहाव में बह गए।

तीन दिन तक चले खोज अभियान के बाद 4 अगस्त को करियांगोडे नदी से उनका शव बरामद हुआ। 6 अगस्त को उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार दिया गया।

राजेश रैपलिंग प्रशिक्षक थे और राष्ट्रीय कैडेट कोर के छात्रों को पर्वतारोहण सिखाते थे। उन्होंने 2018 की बाढ़ और 2024 के वायनाड भूस्खलन सहित कई आपदाओं में बचाव कार्यों में भाग लिया था।
बचाव दल के सदस्य बीजू के अनुसार, बेनी नारियल के पेड़ से चिपके हुए थे। राजेश तैरकर उनके पास पहुंचे, रस्सी बांधी और अपनी लाइफ़ जैकेट उन्हें पहना दी। लौटते समय अचानक बहाव तेज़ हो गया और राजेश बह गए। लंबे समय तक ठंडे पानी में रहने से संभवतः ऐंठन हो गई होगी।
बेनी ने कहा, “अगर राजेश न होते तो मैं नहीं बच पाता। लेकिन मेरे जैसे बुज़ुर्ग को बचाने के लिए एक युवा को अपनी जान नहीं गंवानी चाहिए थी।”

केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि राजेश का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ होगा। सरकार उनके परिवार की हर संभव मदद करेगी और अधूरे मकान का निर्माण भी पूरा करवाएगी।
राजेश अपने पीछे पत्नी शफ़िया और दो बेटे अर्शान व अभिषेक छोड़ गए हैं। परिवार आर्थिक रूप से कमज़ोर है। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें मलयालम फ़िल्म ‘2018’ के किरदार से जोड़ते हुए केरल का ‘रियल हीरो’ बता रहे हैं।

मित्र विष्णु का कहना है, “हर साल बाढ़ में राजेश जैसे स्वयंसेवक सबसे पहले आगे आते हैं। सरकार को उनके परिवार की पूरी मदद करनी चाहिए।”
रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

