नई दिल्ली: ऊना-इंदौर एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी कोच में सो रहे 78 वर्षीय सेवानिवृत्त अधिकारी की नाक पर एक चूहे ने काट लिया। परिवार उन्हें इंदौर के अस्पताल ले गया, जहां रेबीज का पहला टीका लगाया गया। यह घटना भारतीय रेल की सबसे महंगी बर्थ में हुई। एक अखबार ने तस्वीर के साथ खबर छापी, जिसे रेलविस्पर्स ने एक्स पर साझा किया।
यह कोई जनरल डिब्बा नहीं था। फिर भी चूहा यात्री तक पहुंच गया। रेलवे में कृंतक नियंत्रण (rodent control) कोई दैवीय आपदा नहीं, बल्कि 2015 से ड्यूटी लिस्ट में दर्ज जरूरी काम है।
11 साल पुराना जिम्मा, फिर भी चूहे
28 अगस्त 2015 के बोर्ड पत्र से पर्यावरण एवं हाउसकीपिंग प्रबंधन (EnHM) विंग बना। इसमें कोच सफाई, ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग और कीट-कृंतक नियंत्रण शामिल थे। 2018 के आदेश में इसे और स्पष्ट किया गया। 17 अक्टूबर 2025 के आदेश से मैकेनिकल से और काम EnHM को सौंपे गए—बायो-टॉयलेट, डस्टबिन, वाटरिंग और यहां तक कि हाइड्रोजन ट्रेनसेट भी।
फिर भी जमीनी हकीकत अलग है। 2024 में कई ट्रेनों में सांप, अजगर और कॉकरोच की घटनाएं सामने आईं। उत्तर रेलवे के ‘रेल मदद’ आंकड़ों के अनुसार, 51 दिनों में कोच सफाई की 18,845 शिकायतें आईं, जिनमें 58 प्रतिशत सिर्फ शौचालयों से जुड़ी थीं।

रोज 30 तस्वीरें, असली काम कहां?
25 अगस्त 2026 को EnHM के कार्यकारी निदेशक ने सभी जोनल महाप्रबंधकों को पत्र लिखा। छह व्हाट्सएप कम्युनिटीज बनाई गईं—स्टेशन क्लीनिंग, लंबी दूरी की ट्रेनें, स्वच्छ कोच आदि। हर जोन को रोज कम से कम 25-30 जियो-टैग्ड तस्वीरें पोस्ट करने का आदेश दिया गया। सोलह जोन, हर दिन, साल भर।
पत्र खुद कहता है कि उद्देश्य “केवल तस्वीरें साझा करना नहीं होना चाहिए”, लेकिन अगले ही पैराग्राफ में रोज 30 तस्वीरें अनिवार्य कर दी गईं। समीक्षा “सर्वोच्च स्तर” पर होगी।
व्हाट्सएप पर निगरानी, ‘मेक इन इंडिया’ का उपहास?
यह पूरी निगरानी मेटा के व्हाट्सएप पर चल रही है, न कि सरकारी ‘संदेश’ ऐप पर। दिलचस्प बात यह कि जुलाई-अगस्त 2026 में मेटा ने प्रधानमंत्री के वीडियो हटाने को लेकर माफी मांगी थी। ठीक तीन सप्ताह बाद रेलवे बोर्ड ने व्हाट्सएप को अनिवार्य बना दिया।
जिम्मेदारी किसकी?
EnHM मुख्य रूप से कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट करता है। फील्ड की असली जिम्मेदारी अभी भी अन्य विभागों के पास है। 11 साल बाद भी हाउसकीपिंग का काम पूरी तरह हस्तांतरित नहीं हुआ। फर्स्ट एसी में चूहे की घटना तब होती है जब जिम्मेदार लोग अपना काम ईमानदारी से नहीं करते ,रेलवे बोर्ड से तस्वीरें मांगने के साथ यह भी पूछा जाना चाहिए—चूहों की गिनती किसने की?
रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

