नई दिल्ली: लद्दाख के प्रमुख पर्यावरणविद् और कार्यकर्ता सोनम वांगचुक फिलहाल दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी पत्नी डॉ. गीतांजलि अंगमो लगातार उन्हें किसी अच्छे प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट कराने की मांग कर रही हैं। इस मुद्दे पर दिल्ली हाई कोर्ट भी पहुंच चुकी हैं, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी।

गीतांजलि अंगमो अपनी इस जिद के पीछे कई गंभीर कारण बता रही हैं। आइए जानते हैं वो 3 बड़े कारण जो उन्हें सोनम वांगचुक को सरकारी अस्पताल से प्राइवेट अस्पताल ले जाने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
1. बढ़ रहा ब्लड प्रेशर, अस्पताल का माहौल बन रहा है तनावपूर्ण
गीतांजलि अंगमो ने कहा कि कल रात सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार उनका ब्लड प्रेशर बढ़कर 125/85 हो गया है, जबकि उनका सामान्य ब्लड प्रेशर 110/70 रहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सफदरजंग अस्पताल में बने तनावपूर्ण माहौल के कारण यह बढ़ोतरी हुई है वे अपने पति को अपने पसंद के डॉक्टरों के अधीन बेहतर इलाज दिलाना चाहती हैं, जहां माहौल शांत और अनुकूल हो।
.2. संसद मार्च रोकने की साजिश?
गीतांजलि का आरोप है कि केंद्र सरकार सोनम वांगचुक के 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च से बेहद चिंतित थी। इसमें लाखों लोग शामिल होने वाले थे। इसलिए उन्हें आनन-फानन में जंतर-मंतर से उठाकर जबरन सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया गया।
उनका कहना है कि सरकार की कोई भी चिंता सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर नहीं, बल्कि उनके आंदोलन को रोकने को लेकर है।
3. प्राइवेट अस्पताल पर ज्यादा भरोसा
गीतांजलि अंगमो ने बताया कि जब सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से उठाया गया, तब उनकी हालत पूरी तरह स्थिर थी। पिछली शाम की रिपोर्ट में पोटैशियम लेवल 4.3 और अन्य सभी पैरामीटर नॉर्मल थे।
उन्होंने सादे कपड़ों में पुलिस द्वारा सोनम को बेरहमी से उठाए जाने पर भी सवाल उठाए। गीतांजलि को सरकारी अस्पतालों की बजाय प्राइवेट अस्पतालों पर ज्यादा भरोसा है, जहां बेहतर सुविधाएं और व्यक्तिगत देखभाल उपलब्ध होती है।
वर्तमान स्थिति: सोनम वांगचुक का इलाज फिलहाल सफदरजंग अस्पताल में एम्स के डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा है। गीतांजलि अंगमो अपनी मांग पर अड़ी हुई हैं और आगे भी कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी में हैं।
रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

