वह स्टील जो कभी था ही नहीं!₹6 प्रति किलो के फर्जीवाड़े में सैकड़ों करोड़ का घोटाला, अमृत भारत के 12 इंजन पहले से सेवा में

वाराणसी, 6 जून 2026

भारतीय रेलवे के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अमृत भारत एक्सप्रेस के लोकोमोटिव शेल्स (इंजन के बाहरी ढांचे) में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। आवश्यक सीसीयू (CCU) ग्रेड तांबा-युक्त जंग-रोधी स्टील की जगह साधारण IS 2062 स्ट्रक्चरल स्टील का उपयोग किया गया। इस फर्जीवाड़े पर आधारित 12 लोकोमोटिव पहले ही देश के विभिन्न शेडों में यात्रियों को ले जा रहे हैं, जबकि उनकी “मरम्मत” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के नौबतपुर में राष्ट्रीय राजमार्ग-19 पर चल रही है।

धोखाधड़ी की बुनियाद

हावड़ा स्थित एक सप्लायर ने नवंबर 2024 से अप्रैल 2026 के बीच चार खरीद आदेशों के तहत BLW/DES/MISC/784 विनिर्देश के विपरीत सस्ता स्टील सप्लाई किया। बीएलडब्ल्यू (Banaras Locomotive Works) की सतर्कता टीम के XRF स्पेक्ट्रोमीटर टेस्ट में पुष्टि हुई कि सभी प्लेटों और सेक्शनों में तांबे की मात्रा शून्य पाई गई।

प्रत्येक शेल की कीमत लगभग ₹80 लाख है। साधारण स्टील से ₹6 प्रति किलो सस्ता पड़ने के बावजूद बिल महंगे CCU ग्रेड के हिसाब से बनाए गए। इस फर्म से आने वाले लगभग 700 शेल्स अभी पाइपलाइन में हैं।

वाराणसी में हाईवे पर मरम्मत का तमाशा

नौबतपुर के पास एनएच-19 पर पिछले दो हफ्तों से ट्रक खड़े हैं, जिन पर अमृत भारत लोकोमोटिव के बॉडी शेल्स लदे हुए हैं। एक अस्थायी घेरे में पैचवर्क और मरम्मत का काम चल रहा है। पत्रकारों को पूछताछ करने पर खदेड़ दिया गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, हावड़ा फैक्ट्री भरी होने के कारण इन शेल्स को वहां वापस भेजना महंगा पड़ रहा था, इसलिए राजमार्ग किनारे सुधार का रास्ता अपनाया गया। रेल प्रशासन और जिला प्रशासन दोनों चुप हैं।

संस्थागत खामियां और दोहरा मापदंड

  • CLW (Chittaranjan Locomotive Works) ने वेंडर को सात प्रमुख सब-असेंबलियों (हेडस्टॉक, बोल्स्टर, सेंट्रल अंडरफ्रेम आदि) की स्वीकृत सूची से हटा दिया था, जो पूरे शेल वजन का 90% से ज्यादा हैं।
  • फिर भी UVAM वेंडर पोर्टल पर पूरा लोको शेल असेंबली के लिए यह फर्म Approved Part-I Source बनी हुई है और ऑर्डर मिल रहे हैं।
  • नियमों की खामी: डीलिस्ट होने के बावजूद पुराने ऑर्डर की आपूर्ति जारी रखने की अनुमति है, जिसका फायदा उठाकर वेंडर फिर से सूची में शामिल होने का आधार बना सकता है।

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ने 8 मई 2026 को नकली सामान सप्लाई करने वालों के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए थे। कुछ लाख रुपये के सर्किट ब्रेकर घोटाले में तेजी से कार्रवाई हुई, लेकिन सैकड़ों करोड़ के इस मामले में अब तक कोई FIR नहीं दर्ज की गई। उल्टा, XRF टेस्ट करने वाले इंस्पेक्टर्स का तबादला कर दिया गया।

नैतिक पतन के पांच बड़े उल्लंघन

  1. सार्वजनिक सुरक्षा से समझौता: घटिया स्टील वाले इंजन यात्री ट्रेनों में दौड़ रहे हैं, जिनमें लंबे समय में जंग और संरचनात्मक थकान का खतरा है।
  2. धोखाधड़ी की लॉन्ड्रिंग: दंडित वेंडर को “सफल आपूर्ति” का रिकॉर्ड बनाने की छूट।
  3. दोहरा मापदंड: छोटे घोटालों में सख्ती, बड़े में चुप्पी।
  4. व्हिसलब्लोअर पर प्रतिशोध: सच्चाई उजागर करने वालों का तबादला।
  5. मौन सहमति: एक इकाई का पता चलने पर दूसरी इकाइयों को सूचना नहीं दी गई।

Railwhispers.com (11 मई और 19 मई 2026) की दो भाग वाली रिपोर्ट और RailSamachar की ग्राउंड रिपोर्टिंग पर आधारित इस पूरे मामले में एक वरिष्ठ सेवानिवृत्त रेल अधिकारी का महत्वपूर्ण योगदान है। रिपोर्ट में XRF टेस्ट रिपोर्ट, रिजेक्शन नोटिस और UVAM पोर्टल रिकॉर्ड्स के दस्तावेजी सबूत शामिल हैं।

अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। रेलमंत्री और रेलवे बोर्ड को इस गंभीर मामले पर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए, अन्यथा प्रधानमंत्री के क्षेत्र में चल रहे इस फर्जीवाड़े की जिम्मेदारी उन पर भी आएगी।अमृत भारत एक्सप्रेस, BLW वाराणसी, लोकोमोटिव घोटाला, CCU स्टील, IS 2062, रेलवे भ्रष्टाचार, वाराणसी नौबतपुर

रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

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