मेगा टेंडरों से MSMEs और मध्यम ठेकेदार बाहर, CVC-GFR नियमों के पालन की मांग:पढ़िए

नई दिल्ली / मुंबई।

रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और स्मार्ट सिटी मिशन जैसी प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में लगातार जारी हो रहे भारी-भरकम (मेगा) टेंडरों को लेकर उद्योग विशेषज्ञों और सार्वजनिक नीति विश्लेषकों ने गंभीर चिंता जताई है। सवाल यह उठाया जा रहा है कि क्या टेंडरों के अस्वाभाविक समेकन (Over-bundling) से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) और मध्यम स्तर के ठेकेदारों को जानबूझकर निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा से बाहर किया जा रहा है।

वर्तमान में 500 से 1000 करोड़ रुपये या उससे अधिक मूल्य के अनुबंध जारी किए जा रहे हैं। इनमें वित्तीय टर्नओवर और बैंक गारंटी की अत्यंत कठोर शर्तें रखी जा रही हैं। इन शर्तों के कारण कई कुशल और अनुभवी क्षेत्रीय ठेकेदार बोली प्रक्रिया के प्री-क्वालिफिकेशन चरण में ही बाहर हो जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बाजार में एकाधिकार को बढ़ावा मिल रहा है और प्रतिस्पर्धा की कमी के कारण सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ भी पड़ रहा है।

उद्योग जगत और नीति विशेषज्ञों ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) तथा सामान्य वित्तीय नियम (GFR-2017) के प्रावधानों का सख्ती से पालन करने की मांग की है। उनके मुताबिक:

  • अस्वाभाविक बंडलिंग पर रोक: CVC के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी कार्य को बिना ठोस तकनीकी या प्रशासनिक औचित्य के अस्वाभाविक रूप से बड़ा नहीं बनाया जाना चाहिए।
  • उचित अनुबंध विभाजन: बड़ी परियोजनाओं को तर्कसंगत छोटे पैकेजों में बांटने से अधिक कंपनियां भाग ले सकेंगी, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, प्रतिस्पर्धी दरें मिलेंगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन होगा।
  • लागत-लाभ विश्लेषण: बड़े टेंडर जारी करने से पहले खरीद प्राधिकरणों को लागत-लाभ अनुपात और जनहित में औचित्य फाइल पर स्पष्ट रूप से दर्ज करना अनिवार्य किया जाए।

CVC के अनुसार वित्तीय टर्नओवर, बैंक गारंटी और पूर्व अनुभव की शर्तें कार्य के वास्तविक परिमाण के आनुपातिक होनी चाहिए। नीति आयोग भी घरेलू और स्थानीय ठेकेदारों को राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला से बाहर न करने पर जोर देता है। अक्सर देखा गया है कि मेगा-टेंडर जीतने वाली बड़ी कंपनियां काम को छोटी स्थानीय कंपनियों को सब-लेट कर देती हैं और केवल मध्यस्थ मार्जिन कमाती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक खरीद प्रणाली की रीढ़ पारदर्शिता, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और उत्तरदायित्व है। बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में टिकाऊ विकास और करदाताओं के धन के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए MSMEs को बराबरी का अवसर (Level Playing Field) देना आवश्यक है। जहाँ अत्यंत जटिल और उन्नत तकनीक वाली परियोजनाओं में बड़े अनुबंध जरूरी हो सकते हैं, वहीं सामान्य सिविल और रखरखाव कार्यों में संतुलित पैकेजिंग अपनाई जानी चाहिए।

रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

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