शिवाजी महाराज की प्रतिमा को लेकर मीरा-भाईंदर में सियासी घमासान, शिवसेना ने BJP पर मॉल बनाने की साजिश का आरोप लगाया……..!

मीरा-भाईंदर (महाराष्ट्र), 12 मई 2026:
मीरा-भाईंदर महानगरपालिका क्षेत्र के काशीमीरा चौक पर स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रसिद्ध अश्वारूढ़ प्रतिमा को लेकर तीखा राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। प्रतिमा की मरम्मत और संभावित स्थानांतरण के प्रस्ताव पर विपक्षी दलों ने सत्ताधारी भाजपा पर जमकर हमला बोला है।

विवाद की जड़

मीरा-भाईंदर महानगरपालिका की महासभा में हाल ही में काशीमीरा चौक वाली लगभग 30 साल पुरानी शिवाजी महाराज की प्रतिमा को मरम्मत के नाम पर हटाने और स्थानांतरित करने का प्रस्ताव भाजपा के बहुमत से पारित कर दिया गया। महानगरपालिका में कुल 95 नगरसेवकों में भाजपा के पास 78 सीटें हैं, जबकि कांग्रेस के 13 और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के 3 सदस्य हैं। प्रस्ताव के दौरान शिवसेना और कांग्रेस ने इसका खुलकर विरोध किया।

शिवसेना का आरोप

शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रतिमा को मरम्मत के बहाने हटाकर स्थायी रूप से हटाने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने दावा किया कि उसी महासभा में प्रतिमा के दोनों ओर महानगरपालिका की जमीन पर शॉपिंग मॉल बनाने का प्रस्ताव भी पास किया गया। सरनाईक ने कहा कि 2017 में घोडबंदर में नई प्रतिमा लगाते समय भी पुरानी प्रतिमा हटाने का शपथपत्र दिया गया था और अब उसी योजना को लागू करने की कोशिश हो रही है।

शिवसेना मीरा-भाईंदर शहर प्रमुख विक्रम प्रताप सिंह ने चेतावनी दी कि अगर महाराष्ट्र के आराध्य देवता छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा हटाई गई तो शिवसेना सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगी।

भाजपा का जवाब

भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि प्रतिमा में दरारें आ गई हैं और विशेषज्ञों की सलाह पर मरम्मत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया:

“प्रतिमा को केवल अस्थायी रूप से हटाया जाएगा और मरम्मत के बाद ठीक उसी स्थान पर पुनः स्थापित किया जाएगा। कुछ लोग इस मुद्दे पर अनावश्यक राजनीति कर रहे हैं।”

मेहता ने यह भी कहा कि उन्होंने वेस्टर्न होटल के पास दुनिया की सबसे ऊंची शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित कराई है, जो उनके सम्मान को दर्शाता है।

अन्य दलों की प्रतिक्रिया

राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने भी प्रतिमा हटाने का विरोध किया है। एमएनएस ने इसे शिवाजी महाराज का अपमान बताते हुए खुला विरोध करने की बात कही है।

फिलहाल स्थिति

प्रशासन विशेषज्ञ मूर्तिकारों की नियुक्ति पर विचार कर रहा है, लेकिन यह अभी स्पष्ट नहीं है कि मरम्मत के बाद प्रतिमा को मूल स्थान पर ही लगाया जाएगा या कहीं और स्थानांतरित किया जाएगा। इस अनिश्चितता के कारण शिवप्रेमियों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है। यह मुद्दा आने वाले दिनों में मीरा-भाईंदर की राजनीति को और गरमा सकता है।

रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

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