बलात्कारियों का बचाव करने वाले शिक्षा मंत्री हैं: राहुल गांधी का प्रल्हाद जोशी पर आरोप

नए शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया था।

संसद परिसर के बाहर राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने ऐसे व्यक्ति को शिक्षा मंत्री बनाया है जो बलात्कारियों का बचाव करता है। उन्होंने कहा, “शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर स्टूडेंट्स ने आंदोलन किया, लाठियां खाईं और इसके बाद बीजेपी ने एक ऐसे आदमी को कैबिनेट में रखा है जो बलात्कारियों का बचाव करता है। यह सबसे खराब किस्म के आदमी हैं। इससे ज्यादा खराब आदमी कोई नहीं हो सकता जो कहता है कि बलात्कारियों को सुरक्षा की जरूरत है।”

राहुल गांधी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री के पास कई विकल्प थे, लेकिन उन्होंने जानबूझकर ऐसे व्यक्ति को चुना। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी पोस्ट कर यही आरोप दोहराया और कहा कि प्रल्हाद जोशी शिक्षा व्यवस्था और उसमें पढ़ने वाली करोड़ों युवा महिलाओं का अपमान हैं।

लोकसभा में भी वही आरोप

इससे पहले लोकसभा में पेपर लीक से जुड़े ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने भी यही आरोप लगाए थे। उन्होंने छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और अन्य कार्रवाइयों का जिक्र करते हुए नए शिक्षा मंत्री पर सवाल उठाए।

इस बयान पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, प्रल्हाद जोशी और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने तीखा विरोध जताया। किरेन रिजिजू ने इसे चरित्र हनन बताते हुए कार्यवाही से हटाने की मांग की।

प्रल्हाद जोशी का खंडन

प्रल्हाद जोशी ने सदन में ही आरोपों का खंडन किया। उन्होंने कहा, “प्रियंका जी को ऑथेंटिकेट करना चाहिए, वरना मिसइंफॉर्मेशन के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। मैं सदन में मौजूद हूं, मुझे इस बारे में रूल 353 के तहत कोई नोटिस नहीं दिया गया है। इसलिए मैं इसका खंडन करता हूं। इसे एक्सपंज किया जाना चाहिए और उनको माफी मांगनी चाहिए।”

2022 का विवादित बयान

आधार 2022 का एक बयान है। गुजरात सरकार ने बिलकिस बानो मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे 11 दोषियों को रिहा कर दिया था। तब तत्कालीन केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने एनडीटीवी से कहा था कि सरकार और संबंधित लोगों ने फैसला ले लिया है, तो उन्हें इसमें कुछ गलत नहीं लगता क्योंकि यह कानून की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा था कि दोषियों ने जेल में काफी समय बिताया है और उनके लिए रिहाई का प्रावधान है।

जनवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने इन दोषियों की रिहाई का फैसला रद्द कर दिया था। यह विवाद लोकसभा में पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान और तेज हो गया है।

रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

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