पटना: बिहार सरकार द्वारा नीट प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की घोषणा के बावजूद मंगलवार दोपहर तक गिरफ़्तार छात्रों की रिहाई नहीं हो सकी। इसके बाद राज्य के महाधिवक्ता एसडी संजय ने सभी जिलाधिकारियों और लोक अभियोजकों को निर्देश दिया है कि वे सरकार के फैसले का पालन करते हुए 26 जुलाई 2026 शाम 6 बजे से पहले विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लें।

पटना हाईकोर्ट में महाधिवक्ता कार्यालय की ओर से जारी नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि जिलाधिकारी संबंधित अधिकारियों को तुरंत निर्देश जारी करें। इससे पहले गृह विभाग ने भी राज्य भर में 26 जुलाई शाम 6 बजे तक दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने और गिरफ्तार लोगों को जल्द रिहा करने की बात कही थी।
परिजन और कानूनी मददगार परेशान
चाणक्य लॉ यूनिवर्सिटी की लीगल एड यूनिट के रमन कुमार ने बताया कि वे बेऊर और गांधी मैदान थाने के चक्कर लगाकर थक चुके हैं। थाने वाले कह रहे हैं कि अभी तक कोई आदेश नहीं पहुंचा है। रमन विश्वविद्यालय के दो गिरफ्तार छात्रों प्रशांत प्रखर और अंकित कुमार की रिहाई की कोशिश कर रहे हैं।
बेऊर जेल के बाहर अभिभावकों की भीड़ लगी हुई है। नूतन अपने छोटे भाई दीपक कुमार की रिहाई के लिए परेशान हैं। उन्होंने दावा किया कि उनका भाई सिर्फ रील बनाने गया था, जिसे पुलिस ने जबरन पकड़ लिया। सुपौल से आए सुरेश कुमार ने कहा कि उनका बेटा मोबाइल ठीक कराने गांधी मैदान गया था और वहीं गिरफ्तार हो गया। कई परिवारों ने दावा किया कि उनके बच्चे हिंसा में शामिल नहीं थे।
आंकड़े और राजनीतिक प्रतिक्रिया
पुलिस मुख्यालय के अनुसार आंदोलन के दौरान राज्य भर में 59 एफआईआर दर्ज हुईं, जिनमें 999 नामजद अभियुक्त थे। इनमें से 407 गिरफ्तार हुए। 73 नाबालिग भी जेल भेजे गए। 20 जिले प्रभावित रहे। सबसे ज्यादा असर पटना, सिवान, सारण, जहानाबाद, भागलपुर और दरभंगा में दिखा। पटना में अकेले 24 एफआईआर हुईं। 164 पुलिसकर्मी और 19 छात्र-आमजन घायल हुए। 19 सरकारी वाहन क्षतिग्रस्त हुए।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने चेतावनी दी कि अगर बुधवार शाम 7 बजे तक छात्रों को रिहा नहीं किया गया और मुकदमे वापस नहीं लिए गए तो 30 जुलाई सुबह 7 बजे से पूरे बिहार में आंदोलन होगा। उनके भाई तेज प्रताप यादव भी बेऊर जेल में बंद हैं। सीपीआई(एमएल) राज्य सचिव कुणाल ने भी मुकदमा वापसी में किसी भी टालमटोल को अस्वीकार करने की बात कही।
हिंसा और एके-47 का मुद्दा
22, 23 और 25 जुलाई को हुए प्रदर्शनों में हिंसा हुई। सिवान में एसआईटी जवान अभिषेक पटेल द्वारा एके-47 के इस्तेमाल का वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया। सिवान एसपी पूरण झा ने कहा कि जान-माल की सुरक्षा के लिए 4 राउंड फायरिंग हुई, लेकिन एके-47 से हवा में गोली चलाई गई। तीन घायलों को एके-47 की गोली नहीं लगी।
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि विधायकों और पत्रकारों को निशाना बनाकर हिंसा फैलाने वाले छात्र नहीं बल्कि असामाजिक तत्व थे। एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) केएस अनुपम ने दावा किया कि पुलिस ने संयम बरता और हिंसा शुरू होने पर ही हल्का बल प्रयोग किया।
वरिष्ठ पत्रकार संतोष सिंह का कहना है कि इस आंदोलन ने पहले से आलोचना झेल रही सम्राट सरकार को बैकफुट पर ला दिया है। पहले तस्वीरें निकालकर इनाम घोषित करना और फिर सभी को छोड़ने की घोषणा प्रशासनिक मशीनरी के मनोबल को प्रभावित करती है।
परिजन अभी भी जेल के बाहर इंतजार कर रहे हैं। महाधिवक्ता के निर्देश के बाद रिहाई प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।
रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

