न्यू जलपाईगुड़ी/गुवाहाटी: पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) के निर्माण संगठन में रोटेशन और ट्रांसफर पॉलिसी का खुला उल्लंघन हो रहा है। फील्ड कर्मचारियों ने रेलवे बोर्ड, NFR प्रशासन और केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) तक शिकायत पहुंचाते हुए पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग की है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, अधिकारी जमालुद्दीन खान पिछले 15 वर्षों से अधिक समय से न्यू जलपाईगुड़ी (NJP) में ही तैनात हैं। कागजों पर उनका पदनाम समय-समय पर बदलता रहा—ADEN/NJP से XEN/RE/NJP और अब XEN/Con/NJP—लेकिन वास्तविकता में वे एक ही स्टेशन पर जमे रहे। ट्रांसफर के कागजी फेरबदल के बावजूद उन्हें असामान्य रूप से लंबे समय तक NJP में बनाए रखा गया।

XEN/Con/NJP के रूप में उनकी मौजूदा पदस्थापना 20 अक्टूबर 2023 के कार्यालय आदेश के तहत महज छह महीने की अस्थायी व्यवस्था थी। निर्धारित अवधि बीतने के महीनों बाद भी वे उसी पद पर काबिज रहे।
आदेश जारी, अनुपालन अधूरा
3 जुलाई 2026 को सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन से कार्यालय आदेश संख्या 64/2025 (Gaz) जारी हुआ। इसमें दिव्य कुमार मिली (AXEN/Con/G-2/MLG) को पदोन्नत कर XEN/Con/NJP नियुक्त किया गया और जमालुद्दीन खान का स्थानांतरण XEN/Con/Mariani किया गया।
नए अधिकारी दिव्य कुमार मिली ने न्यू जलपाईगुड़ी में कार्यभार संभाल लिया है, लेकिन ट्रांसफर आदेश का पूरा पालन नहीं हुआ। जमालुद्दीन खान को NJP परिसर के भीतर ही अन्य कार्यों में समायोजित कर दिया गया है। सूत्रों का दावा है कि वे इस स्थानांतरण को रद्द या संशोधित कराने के लिए मुख्य अभियंता (CE) और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (CAO/Const.) के चक्कर काट रहे हैं।
कर्मचारियों में रोष
इस दोहरे रवैये से फील्ड कर्मचारियों में भारी असंतोष है। उनका कहना है कि स्थानांतरण नीति का उद्देश्य संस्थागत ईमानदारी और निष्पक्षता बनाए रखना है। सक्षम अधिकारी के आदेशों की अनदेखी से कर्मचारियों का मनोबल टूटेगा और रेल प्रशासन की साख प्रभावित होगी। कर्मचारी जीएम/कंस्ट्रक्शन और वरिष्ठ अधिकारियों से पूछ रहे हैं कि स्थानांतरण आदेश के अनुपालन में देरी क्यों हो रही है? उन्होंने निष्पक्ष और पारदर्शी समीक्षा कर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

अधिकारी का पक्ष
जमालुद्दीन खान ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि वे लगातार 15 साल से एक जगह कार्यरत नहीं रहे। इस बीच वे आरई में गुवाहाटी, लमडिंग और न्यू जलपाईगुड़ी में भी तैनात रहे। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी हाई शुगर की मरीज हैं, इसलिए प्रशासन ने उनकी मजबूरी समझते हुए कुछ राहत दी। वे पूरी लगन से काम करते हैं और प्रशासन को शिकायत का मौका नहीं देते। बहरहाल, उन्होंने कहा कि सही-गलत की जांच प्रशासन पर निर्भर है और रोटेशन पॉलिसी पर अमल होना चाहिए।
यह मामला NFR में ट्रांसफर नीति के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कर्मचारियों की मांग है कि नियमों के मुताबिक तुरंत कार्रवाई हो, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

