सुप्रीम कोर्ट का सभी हाईकोर्ट्स को बड़ा निर्देश: बेल याचिकाओं की स्थिति रिपोर्ट तुरंत दाखिल करें, देरी पर सख्त चिंता

नई दिल्ली, 12 मई 2026

सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के हाईकोर्ट्स में जमानत (बेल) याचिकाओं के लंबित पड़े मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सभी हाईकोर्ट्स को सख्त निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा है कि जमानत संबंधी याचिकाओं की स्थिति रिपोर्ट तुरंत दाखिल की जाए और इन मामलों का तेजी से निपटारा सुनिश्चित किया जाए।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने सोमवार को सनी चौहान बनाम पंजाब राज्य मामले की सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण आदेश दिया। बेंच ने स्पष्ट रूप से कहा कि उसकी टिप्पणियों को किसी भी हाईकोर्ट की आलोचना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ये निर्देश पूरी तरह से न्यायिक व्यवस्था की कार्यक्षमता को मजबूत करने और आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से दिए गए हैं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट पर सबसे ज्यादा चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने सबसे अधिक चिंता इलाहाबाद हाईकोर्ट की स्थिति को लेकर जताई। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि भले ही वहां के जज एक दिन में सैकड़ों मामलों की सुनवाई कर रहे हों, फिर भी जमानत याचिकाओं की पेंडेंसी (लंबितता) बेहद ज्यादा हो गई है।

कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और प्रशासनिक समिति को जिम्मेदारी सौंपी कि वे तुरंत ऐसी व्यवस्था विकसित करें जिसमें हर जमानत याचिका के लिए निश्चित सुनवाई तारीख तय हो सके। साथ ही न्यायिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर इन मामलों को कॉज लिस्ट में प्राथमिकता दी जाए।

अन्य हाईकोर्ट्स की स्थिति

  • पटना हाईकोर्ट: कोर्ट ने चिंता जताई कि यहां जमानत के मामले कभी-कभी कई महीनों तक टल जाते हैं।
  • मध्य प्रदेश हाईकोर्ट: एक साल पहले यहां 63,000 से अधिक जमानत याचिकाएं लंबित थीं। सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई कि अब तक इनमें काफी कमी आई होगी, लेकिन स्थिति की समीक्षा की जरूरत है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिकांश हाईकोर्ट्स ने पहले ही लंबित मामलों का डेटा उपलब्ध करा दिया है और सुधारात्मक कदम उठाए हैं, इसलिए पूरे डेटा को आदेश में शामिल करने की जरूरत नहीं समझी गई।

सुप्रीम कोर्ट के अहम सुझाव

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत मामलों को सुव्यवस्थित करने के लिए कई व्यावहारिक सुझाव दिए हैं:

  1. स्वचालित सॉफ्टवेयर आधारित लिस्टिंग: जमानत याचिकाओं को साप्ताहिक या पाक्षिक आधार पर स्वचालित रूप से लिस्ट किया जाए।
  2. निश्चित समय-सीमा: नई जमानत याचिका दाखिल होने के एक सप्ताह के अंदर सुनवाई के लिए लिस्ट होनी चाहिए।
  3. स्टेटस रिपोर्ट अनिवार्य: पहली सुनवाई से पहले राज्य सरकार या संबंधित एजेंसी को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
  4. अग्रिम प्रति: जमानत याचिका की कॉपी एडवोकेट जनरल के कार्यालय या नामित सरकारी वकील को पहले ही उपलब्ध कराई जाए।
  5. अनावश्यक टालमटोल पर रोक: सरकारी वकीलों द्वारा बिना वजह अगली तारीख मांगने की प्रवृत्ति को हतोत्साहित किया जाए। कोर्ट ने याद दिलाया कि जमानत सुनवाई मौलिक अधिकार (Article 21) से जुड़ा विषय है और इसमें अदालतों का गंभीर कर्तव्य है।
  6. स्वत: लिस्टिंग: जिन मामलों में सुनवाई नहीं हो पाई, उन्हें अपने आप अगली तारीख पर सूचीबद्ध किया जाए

यह पूरा मामला तब सामने आया जब सुप्रीम कोर्ट ने पहले पूरे देश के हाईकोर्ट्स से लंबित जमानत याचिकाओं का पूरा डेटा मांगा था। अधिकांश हाईकोर्ट्स ने डेटा उपलब्ध करा दिया, लेकिन कुछ अदालतों में स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है।

सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार यह बात दोहराई कि जमानत एक मौलिक अधिकार है और इसे बिना वजह रोका या टाला नहीं जाना चाहिए। लंबित जमानत याचिकाएं न केवल आरोपी के अधिकारों का हनन करती हैं, बल्कि न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाती हैं।

कानूनी विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

कई वरिष्ठ वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट्स में जमानत मामलों की सुनवाई में हो रही देरी से आम लोगों को काफी परेशानी होती है। विशेष रूप से इलाहाबाद और पटना हाईकोर्ट में पेंडेंसी की समस्या लंबे समय से जानी जाती रही है।

एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट का यह कदम सराहनीय है। अगर हाईकोर्ट्स इन दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करें तो जमानत याचिकाओं का निपटारा कुछ हफ्तों में हो सकता है।”

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद सभी हाईकोर्ट्स में गहन तैयारियां शुरू हो गई हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने पहले ही प्रशासनिक बैठक बुलाकर इस पर चर्चा शुरू कर दी है।

यह आदेश उन हजारों लोगों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आया है जिनकी जमानत याचिकाएं लंबे समय से लंबित पड़ी हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ संदेश दिया है कि न्याय में देरी, न्याय से इंकार के समान है।

रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!