नई दिल्ली, 26 अप्रैल 2026: माननीय मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ द्वारा दिए गए निर्णायक न्यायिक आदेश के बावजूद ऑल इंडिया आरपीएफ एसोसिएशन (AIRPFA) के पुनर्गठन की प्रक्रिया अंतिम चरण में रेलवे बोर्ड की अनदेखी और देरी के कारण अटकी हुई प्रतीत हो रही है। हाईकोर्ट ने एसोसिएशन के कानूनी और लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करने के लिए सख्त रोडमैप तैयार किया था, लेकिन तीन पर्यवेक्षकों की नियुक्ति न होने से पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। अब केवल तीन महीने से भी कम समय शेष रहने के साथ एसोसिएशन ने रेलवे बोर्ड और महानिदेशक, रेलवे सुरक्षा बल (DGRPF) से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
मद्रास हाईकोर्ट का निर्णायक आदेश

21 नवंबर 2025 को मदुरै पीठ ने मामले W.P.(MD) No. 2470 of 2020 में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि ऑल इंडिया आरपीएफ एसोसिएशन को एक तदर्थ समिति (Ad Hoc Committee) गठित करनी होगी, जिसमें केवल बल के वर्तमान सेवारत सदस्य ही शामिल किए जा सकते हैं। सेवानिवृत्त कर्मियों को पूरी तरह बाहर रखने का प्रावधान इसलिए किया गया ताकि पिछले वर्षों के विवादों, अनधिकृत उपनियम संशोधनों और प्रशासनिक अनियमितताओं को समाप्त किया जा सके।
कोर्ट के आदेश के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- पिछले सभी विवादास्पद और नियम-विरुद्ध उपनियम संशोधनों को वापस लेना या संशोधित करना।
- रेलवे बोर्ड द्वारा नामित तीन स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की देखरेख में पुनर्गठन संबंधी सभी प्रस्तावों को पारित करना।
- एसोसिएशन के स्थायी पदाधिकारियों के चयन के लिए पूर्ण रूप से निष्पक्ष और लोकतांत्रिक चुनाव कराना।
- पूरी प्रक्रिया को 31 जुलाई 2026 या उससे पहले पूरा करना।
यह आदेश आरपीएफ कर्मियों के संगठनात्मक अधिकारों और संघ की स्वस्थ कार्यप्रणाली को बहाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
अनुपालन में उठाए गए कदम
हाईकोर्ट के निर्देश का पालन करते हुए AIRPFA ने 14 दिसंबर 2025 को एक विशेष वर्चुअल कन्वेंशन आयोजित किया। गूगल मीट प्लेटफॉर्म पर हुई इस बैठक में केवल आरपीएफ के सेवारत सदस्यों ने भाग लिया, ताकि कोर्ट द्वारा लगाए गए प्रतिबंध का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित हो सके।
बैठक में सर्वसम्मति से 16 सदस्यीय तदर्थ कार्यकारिणी का गठन किया गया। प्रमुख पदाधिकारी इस प्रकार चुने गए:
- अध्यक्ष: ए.एस. सिद्दीकी (IPF, हाजीपुर, पूर्व मध्य रेलवे – ECR)
- महासचिव: सुरेश कुमार स्वामी (IPF, ZI, HQ, उत्तर-पश्चिम रेलवे – NWR)
- कार्यकारी अध्यक्ष: डॉ. विजय एस. साल्वे (SI, BSL, मध्य रेलवे – CR)
इस बैठक की पूरी कार्यवाही, मिनट्स और अंतरिम पदाधिकारियों की सूची 21 दिसंबर 2025 को महानिदेशक, रेलवे सुरक्षा बल को आधिकारिक समीक्षा और आगे की कार्रवाई के लिए भेज दी गई थी।
वर्तमान स्थिति और रेलवे बोर्ड पर निर्भरता
पुनर्गठन का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण अब रेलवे बोर्ड की कार्रवाई पर टिका हुआ है। तदर्थ समिति को उपनियमों में आवश्यक संशोधन करने और चुनाव प्रक्रिया शुरू करने के लिए रेलवे बोर्ड द्वारा नामित तीन पर्यवेक्षकों की उपस्थिति कानूनी रूप से अनिवार्य है।
16 अप्रैल 2026 को AIRPFA ने महानिदेशक और रेलवे बोर्ड को एक विस्तृत पत्र भेजकर तीन पर्यवेक्षकों की नियुक्ति में शीघ्रता बरतने का आग्रह किया था। पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि बिना पर्यवेक्षकों के समिति अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं कर सकती और इससे हाईकोर्ट के आदेश का सीधा उल्लंघन होगा।
एसोसिएशन का कहना है कि 31 जुलाई 2026 की समय-सीमा तेजी से नजदीक आ रही है। यदि रेलवे बोर्ड जल्दी से तीन पर्यवेक्षक नियुक्त नहीं करता तो न केवल कोर्ट आदेश का अनुपालन प्रभावित होगा, बल्कि आरपीएफ कर्मियों के बीच संगठनात्मक लोकतंत्र बहाल करने की प्रक्रिया भी लंबित रह जाएगी। इससे कर्मियों के बीच असंतोष बढ़ सकता है और एसोसिएशन की वैधता पर भी सवाल उठ सकते हैं।
एसोसिएशन की अपील
AIRPFA ने रेलवे बोर्ड, महानिदेशक आरपीएफ और संबंधित अधिकारियों से मजबूत अपील की है कि हाईकोर्ट के निर्देशों का पूर्ण और तत्काल अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। एसोसिएशन का मानना है कि रेलवे बोर्ड की सकारात्मक और त्वरित कार्रवाई से न केवल न्यायिक आदेश का सम्मान होगा, बल्कि आरपीएफ बल के लगभग लाखों कर्मियों को एक मजबूत, पारदर्शी और लोकतांत्रिक संगठन मिल सकेगा।
आरपीएफ कर्मी इस मुद्दे पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। यदि जुलाई 2026 तक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो आगे कानूनी रास्ता अपनाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
यह मामला केवल एक एसोसिएशन के पुनर्गठन तक सीमित नहीं है, बल्कि रेलवे सुरक्षा बल के कर्मियों के संगठनात्मक अधिकारों, लोकतंत्र और पारदर्शिता से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रशासनिक मुद्दा है। रेलवे बोर्ड से अपेक्षा की जा रही है कि वह इस मामले में अपनी जिम्मेदारी समझते हुए शीघ्र आवश्यक कदम उठाए।
AIRPFA आधिकारिक पत्राचार और हाईकोर्ट आदेश के आधार पर)
रिपोर्ट: सुरेंद्र कुमार

