‘वंदे मातरम’ गाने से इनकार पर बवाल, कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख को सदन से एक दिन के लिए सस्पेंड..

इंदौर, 10 अप्रैल 2026 – इंदौर नगर निगम में बजट सत्र के दौरान ‘वंदे मातरम’ गीत गाने से इनकार करने पर कांग्रेस की महिला पार्षद फौजिया शेख अलीम विवाद में घिर गईं। बुधवार को हुई बैठक में इस घटना के बाद भाजपा पार्षदों ने भारी हंगामा किया और अंत में सदन के अध्यक्ष मुन्नालाल यादव ने फौजिया शेख को एक दिन के लिए बैठक से निलंबित कर दिया।

घटना

बैठक में देर से पहुंची कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम से भाजपा पार्षदों ने ‘वंदे मातरम’ गाने का अनुरोध किया। जब उन्होंने गाने से साफ इनकार कर दिया, तो सदन में नारेबाजी शुरू हो गई। भाजपा पार्षदों ने जोरदार विरोध किया और सदन की कार्यवाही बाधित हो गई।

अध्यक्ष मुन्नालाल यादव ने एएनआई को दिए बयान में कहा, “वंदे मातरम गीत को 150 वर्ष पूरे हो चुके हैं। केंद्र सरकार के दिशानिर्देश हैं कि इसे सभी सरकारी कार्यालयों और बैठकों में गाया जाए। फौजिया शेख गीत के दौरान अनुपस्थित रहीं और बाद में आकर कार्यवाही में बाधा डालने लगीं। जब सदस्यों ने उन्हें टोका तो उन्होंने गीत के बारे में आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया। इसलिए उन्हें एक दिन के लिए सदन से निष्कासित किया गया है।”

कांग्रेस पार्षदों की प्रतिक्रिया

कांग्रेस की ही दूसरी पार्षद रुबीना इकबाल खान ने इस घटना पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा, “मैं पिछले 15 वर्षों से फौजिया शेख अलीम के साथ पार्षद हूं। वह हमेशा ‘वंदे मातरम’ गाती रही हैं और इसका सम्मान करती हैं। उस दिन क्या हुआ, यह स्पष्ट नहीं है। वह बोल रही थीं, लेकिन संदर्भ क्या था, मुझे नहीं पता। उन्होंने कहा कि वह ‘वंदे मातरम’ नहीं गाएंगी। इसके बाद हंगामा शुरू हो गया और अध्यक्ष ने उन्हें सस्पेंड कर दिया।”

रुबीना ने आगे कहा कि फौजिया शेख वंदे मातरम के दौरान हमेशा मौजूद रहती थीं और गाती भी थीं। “यह राष्ट्रगान है, इसमें आपत्ति का कोई सवाल ही नहीं उठता।”

विवाद क्यों बढ़ा?

‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान के समान सम्मान प्राप्त है। कई राज्यों और सरकारी संस्थानों में इसे नियमित रूप से गाया जाता है। केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार, सरकारी कार्यक्रमों और बैठकों में इसका गान अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए।

इस घटना ने इंदौर नगर निगम में राजनीतिक तापमान एक बार फिर बढ़ा दिया है। भाजपा पार्षद इसे राष्ट्रभक्ति का मुद्दा बता रहे हैं, जबकि कांग्रेस पक्ष का कहना है कि संदर्भ समझे बिना फैसला लिया गया।

अभी तक फौजिया शेख अलीम की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।घटना देशभर में ‘वंदे मातरम’ को लेकर पहले से चले आ रहे संवेदनशील मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दी है।

रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

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