मुंबई: भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) की 16 लंबित स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्रों के द्विवार्षिक चुनाव का कार्यक्रम सोमवार को जारी कर दिया। मतदान 18 जून को होगा जबकि वोटों की गिनती 22 जून को की जाएगी।
चुनाव कार्यक्रम
- अधिसूचना जारी: 25 मई 2026
- नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि: 1 जून 2026
- नामांकन की जांच: 2 जून 2026
- नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि: 4 जून 2026
- मतदान: 18 जून 2026
- मतगणना: 22 जून 2026
चुनाव प्रक्रिया जून के अंत तक पूरी कर ली जाएगी।

इन 16 सदस्यों का कार्यकाल समाप्त
ये सीटें विभिन्न तारीखों पर खाली हुई थीं। प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
- सोलापुर: प्रशांत प्रभाकर परिचारक (1 जनवरी 2022)
- अहमदनगर: अरुणकाका बभीमराव जगताप (1 जनवरी 2022)
- ठाणे: फाटक रवींद्र सदानंद (8 जून 2022)
- जलगांव: चंदूभाई वी पटेल (5 दिसंबर 2022)
- सांगली-सह-सतारा: कदम मोहनराव श्रीपति (5 दिसंबर 2022)
- नांदेड़, यवतमाल, पुणे, भंडारा-गोंदिया आदि में भी सदस्य सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
- कुछ सीटें 2024 और 2025 में खाली हुईं, जिसमें औरंगाबाद-सह-जालना की सीट (29 अगस्त 2025) शामिल है।
चुनाव में देरी क्यों हुई?
चुनाव आयोग के नियम के अनुसार, स्थानीय निकाय क्षेत्र में कम से कम 75% स्थानीय निकाय सक्रिय और 75% मतदाता पद पर होने चाहिए। पिछले वर्षों में महाराष्ट्र में नगर निगम, नगर परिषद और जिला परिषद चुनावों में भारी देरी के कारण यह शर्त पूरी नहीं हो पाई थी। अब मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने आयोग को सूचित किया है कि सभी 16 क्षेत्रों में यह शर्त पूरी हो गई है।
आचार संहिता लागू
16 निर्वाचन क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। 25 जून तक नई योजनाओं की घोषणा, तबादले या बड़े सरकारी विज्ञापनों पर रोक रहेगी।
राजनीतिक समीकरण बदले, महायुति को बड़ा फायदा
हाल के स्थानीय निकाय चुनावों में महायुति (भाजपा-शिवसेना-एनसीपी) को मिले भारी जनसमर्थन ने समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। पुणे, ठाणे, नासिक, सोलापुर, सांगली-सतारा जैसे प्रमुख क्षेत्र अब महायुति के कब्जे में हैं।
- भाजपा पुणे और सोलापुर जैसे बड़े नगर निगमों पर कब्जे के बाद इन सीटों पर मजबूत दावेदार मानी जा रही है।
- एकनाथ शिंदे की शिवसेना ठाणे और रायगढ़-रत्नागिरी- सिंधुदुर्ग जैसे क्षेत्रों में मजबूत स्थिति में है।
- महा विकास अघाड़ी (MVA) के लिए चुनौती बड़ी है। स्थानीय निकाय चुनावों में करारी हार के बाद नासिक, जलगांव और कोल्हापुर जैसे अपने गढ़ों को बचाना भी मुश्किल हो सकता है।
क्या होगा असर?
इन 16 सीटों पर महायुति को बड़ी जीत मिलने पर विधान परिषद में उसका पूर्ण वर्चस्व स्थापित हो जाएगा। इससे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, औद्योगिक नीतियों और प्रशासनिक सुधारों को आसानी से मंजूरी मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा।
यह चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि स्थानीय निकाय स्तर पर वास्तविक ताकत का परीक्षण होगा।
रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

