रेलवे सुरक्षा से खिलवाड़! कोलकाता की कंपनी ने रेलवे को थोपे नकली सेफ्टी उपकरण, FIR दर्ज

मुंबई: पंजाब मेल ट्रेन के एक कोच में अचानक धुएं के उठने की घटना ने रेलवे में चल रहे बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश कर दिया है। कोलकाता की एक कंपनी ने रेलवे को नकली मोटर प्रोटेक्शन सर्किट ब्रेकर (MPCB) सप्लाई किए, जो यात्रियों की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई पुलिस ने कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।

घटना की शुरुआत

कोलकाता की कंपनी रेलवे के लिए फर्जी सेफ्टी किट करती थी सप्लाई (फाइल फोटो)

इस साल मार्च 2026 में पंजाब मेल के कोच संख्या 222961 में फिरोजपुर के पास अचानक धुआं निकलने लगा। तत्काल जांच में पता चला कि हाई वोल्टेज होने के बावजूद MPCB ट्रिप नहीं हुआ, जिससे बड़े हादसे का खतरा पैदा हो गया था।

सेंट्रल रेलवे की माटुंगा वर्कशॉप में फिट किए गए इन उपकरणों की जांच के बाद रेलवे प्रशासन चौंक गया। तकनीकी जांच समिति की रिपोर्ट में साफ कहा गया कि ये खराब उपकरण यात्रियों की जान को सीधा खतरा थे।

फर्जीवाड़े का खुलासा

रेलवे के मटेरियल विभाग ने 8 नवंबर 2025 को MPCB की खरीद के लिए टेंडर जारी किया था। कोलकाता की कंपनी ने दावा किया कि वह प्रतिष्ठित मूल कंपनी के असली उत्पाद सप्लाई करेगी। 10 दिसंबर 2025 को 325 MPCB का ऑर्डर जारी हुआ और जनवरी 2026 में जाली टेस्ट सर्टिफिकेट के साथ सामान डिलीवर कर दिया गया।

जांच में चौंकाने वाले खुलासे:

  • कंपनी मूल निर्माता की अधिकृत डीलर तक नहीं थी
  • सप्लाई किए गए सभी MPCB नकली थे
  • टेस्ट सर्टिफिकेट पूरी तरह जाली थे
  • 5 मई 2026 को मूल कंपनी के विशेषज्ञों ने लिखित रिपोर्ट में पुष्टि की कि कम से कम पांच MPCB नकली थे

MPCB क्यों है इतना जरूरी?

MPCB रेलवे कोचों का महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण है। यह ओवरलोड या वोल्टेज फ्लक्चुएशन की स्थिति में बिजली सप्लाई काटकर कोच को आग और बड़े नुकसान से बचाता है। नकली उपकरणों के कारण यह सुरक्षा तंत्र काम ही नहीं कर रहा था।

अब क्या होगा?

माटुंगा वर्कशॉप के वरिष्ठ सामग्री प्रबंधक की शिकायत पर शाहू नगर पुलिस स्टेशन में कोलकाता की कंपनी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है। पुलिस अब आगे की जांच कर रही है।

रेलवे प्रशासन ने सभी संबंधित कोचों से नकली उपकरण हटाने और उनकी जगह असली MPCB लगाने का काम तेज कर दिया है।

यह मामला रेलवे की खरीद प्रक्रिया में सख्ती बरतने और टेंडर सत्यापन व्यवस्था को मजबूत करने की मांग को फिर से जोर दे रहा है। यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले किसी भी रैकेट को बख्शा नहीं जाएगा।

रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

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