इंटरनेशनल स्टैंडर्ड पर खरे उतरे भारतीय युद्धपोत: DRDO ने किया नए डिफेंस प्लेटफॉर्म्स का सफल अनावरण

नई दिल्ली/अहिल्यानगर: आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए DRDO और भारतीय नौसेना ने फ्रंटलाइन युद्धपोतों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के हाइड्रोडायनामिक परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। साथ ही, महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में सेना के लिए दो अत्याधुनिक स्वदेशी बख्तरबंद वाहनों (आर्मर्ड प्लेटफॉर्म) का अनावरण किया गया, जिनमें क्रूलेस बुर्ज (बिना चालक वाला तोपखाना) लगाया गया है।

DRDO और नौसेना की संयुक्त सफलता

DRDO की नौसेना विज्ञान और तकनीकी प्रयोगशाला (NSTL) तथा भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो के सहयोग से एक अहम फ्रंटलाइन युद्धपोत परियोजना का हाइड्रोडायनामिक प्रदर्शन मूल्यांकन और मॉडल परीक्षण पूरा किया गया।

इसमें हल हाइड्रोडायनामिक्स, CFD-आधारित सिमुलेशन और प्रायोगिक मॉडल परीक्षण के जरिए प्रतिरोध, प्रणोदन, समुद्री अनुकूलता और गतिशीलता जैसे महत्वपूर्ण पैरामीटरों का मूल्यांकन किया गया। DRDO ने इन परिणामों की तुलना अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड से की, जिसमें सटीकता, विश्वसनीयता और तकनीकी गहराई में पूर्ण समानता पाई गई।

यह परीक्षण DRDO के अध्यक्ष समीर वी. कामत और वरिष्ठ वैज्ञानिकों की उपस्थिति में युद्धपोत उत्पादन और अधिग्रहण नियंत्रक संजय साधु को औपचारिक रूप से सौंपा गया।

महाराष्ट्र में दो स्वदेशी आर्मर्ड प्लेटफॉर्म का अनावरण

DRDO ने महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में भारतीय सेना के लिए दो स्वदेशी आर्मर्ड प्लेटफॉर्म का सफलतापूर्वक अनावरण किया:

  • पहिए वाला (Wheeled) आर्मर्ड प्लेटफॉर्म
  • ट्रैक वाला (Tracked) आर्मर्ड प्लेटफॉर्म

ये दोनों वाहन आधुनिक युद्ध की चुनौतियों को ध्यान में रखकर विकसित किए गए हैं। इनमें स्वदेशी 30mm क्रूलेस बुर्ज और 7.62mm गन लगाई गई है। दोनों प्लेटफॉर्म:

  • टैंक रोधी मिसाइलें (Anti-Tank Missiles) दागने में सक्षम
  • उबड़-खाबड़ इलाकों में आसानी से चलने की क्षमता
  • एम्फीबियस क्षमता (पानी की बाधाओं को पार करने की क्षमता)

आत्मनिर्भरता का लक्ष्य

वर्तमान में इन आर्मर्ड वाहनों में 65% स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। DRDO का लक्ष्य इसे भविष्य में 90% तक बढ़ाने का है।

ये बख्तरबंद वाहन STANAG 4 और 5 सुरक्षा स्तर प्रदान करते हैं, जिससे जमीनी बलों को दुश्मन के विस्फोटों, गोलाबारी और माइन्स से उच्चस्तरीय सुरक्षा मिलेगी।

DRDO से मिली जानकारी

DRDO ने इस उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए लिखा कि NSTL और नौसेना के सहयोग से युद्धपोत परियोजना के हाइड्रोडायनामिक परीक्षण अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरे हैं।

यह विकास आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई गति प्रदान करने वाला है और भारतीय रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

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