मीरा-भाईंदर की 30% जमीन बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता के नाम पर? मंत्री प्रताप सरनाईक के बयान से सियासी बवाल, CM फडणवीस ने टोका
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर जमीन और सत्ता के बीच संभावित हितों का मुद्दा गरमा गया है। दहिसर से काशीगांव मेट्रो कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान कैबिनेट मंत्री प्रताप सरनाईक के हंसी-मजाक के अंदाज में दिए गए बयान ने बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
मंत्री सरनाईक ने मेट्रो ट्रेन में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में दावा किया कि मीरा-भाईंदर क्षेत्र में कम से कम 30 प्रतिशत जमीन अकेले बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता के नाम पर है। उन्होंने यह भी कहा कि मेहता उन्हें उसमें से 10 प्रतिशत हिस्सा देने को तैयार हैं।

मौके पर मौजूद कैमरों और माइक्रोफोन को देखते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने तुरंत मंत्री सरनाईक को टोक दिया और कहा, “अरे, यह सब रिकॉर्ड हो रहा है… हम यहां मजाक करेंगे और ये लोग कुछ भी रिकॉर्ड कर खबर बना देंगे।”
विपक्ष का हमला
कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने इस बयान को गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा, “किसी एक जनप्रतिनिधि के पास शहर की 30% जमीन होना हैरान करने वाला है। यह जमीन किस प्रकार की है? क्या इसमें सरकारी आरक्षणों में हेरफेर हुआ है? जब मंत्री खुद 10% हिस्सेदारी की बात कर रहे हैं, तो इसमें क्या ‘अर्थपूर्ण’ सौदे छिपे हैं?”
इससे पहले बजट सत्र में कांग्रेस नेता नाना पटोले ने भी मीरा-भाईंदर के सेवन इलेवन क्लब को लेकर नरेंद्र मेहता पर सवाल उठाए थे और पूछा था कि आरोपों के बावजूद जांच क्यों नहीं हो रही।
जनता के सवाल
- मीरा-भाईंदर की इतनी बड़ी जमीन एक विधायक के नाम पर कैसे आई?
- क्या इसमें कोई अनियमितता या सरकारी जमीन के दुरुपयोग का मामला है?
- मंत्री का बयान सिर्फ मजाक था या संवेदनशील जानकारी को हल्के अंदाज में छुपाने की कोशिश?
जनहित में यह जरूरी है कि महाराष्ट्र सरकार इस पूरे मामले पर स्पष्ट जानकारी दे और यदि जरूरी हो तो स्वतंत्र जांच कराए। नागरिकों का यह अधिकार है कि वे जान सकें कि उनके शहर की जमीन का मालिकाना हक किसके पास है और उसमें कोई अनियमितता तो नहीं है।अभी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। आगे की कार्रवाई और जांच पर सबकी नजर टिकी हुई है।
रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

