मुंबई। एक तरफ जहां पुलिस का दावा था कि युवक ट्रेन की चपेट में आकर मरा, वहीं कोर्ट ने कहा- “पहली नजर में लगता है कि एग्नेलो वाल्डारिस को गैरकानूनी हिरासत में बुरी तरह पीटा गया था”। 12 साल पुराने इस कस्टोडियल डेथ मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई पुलिस के 8 अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा चलाने का रास्ता साफ कर दिया है।
बॉम्बे हाई कोर्ट की जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस श्याम चांडक की बेंच ने सितंबर 2022 के स्पेशल ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए यह अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में बेहद मार्मिक बात कही- “मृत व्यक्ति न्याय के लिए पुकार नहीं सकता है। यह जीवित लोगों का कर्तव्य है कि मृत के लिए न्याय की गुहार लगाएं।”
2014 की वो डरावनी रात… क्या हुआ था एग्नेलो के साथ?
घटना 15 अप्रैल 2014 की है। 25 वर्षीय एग्नेलो वाल्डारिस (Agnelo Waldaris) को वडाला इलाके में लूट की एक शिकायत के सिलसिले में जीआरपी पुलिस ने हिरासत में लिया था। पुलिस का दावा था कि 18 अप्रैल 2014 को सुबह करीब 11:30 बजे वह हिरासत से भागने की कोशिश कर रहा था और लोकल ट्रेन की चपेट में आकर उसकी मौत हो गई।
लेकिन सह-आरोपियों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि हिरासत के दौरान सभी के साथ बुरी तरह मारपीट और यातना दी गई। कोर्ट ने भी कई विसंगतियों पर सवाल उठाए:
- गिरफ्तारी के तुरंत बाद एग्नेलो के शरीर पर चोट के निशान क्यों थे?
- पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और मेडिकल रिपोर्ट में विरोधाभास क्यों?
- उसे रात के अंधेरे में एक पुलिस स्टेशन से दूसरे स्टेशन क्यों ले जाया जा रहा था?
- गवाहों को धमकियां क्यों दी गईं जिसकी वजह से मामला देर से खुला?
कोर्ट ने साफ कहा कि इन सवालों का कोई ठोस जवाब पुलिस की तरफ से नहीं दिया गया। बेंच ने टिप्पणी की कि वाल्डारिस शायद पुलिस की आगे की यातना से बचने के लिए ट्रेन की तरफ भागा था।

ये हैं 8 आरोपी पुलिस अधिकारी, जिन पर अब हत्या का केस चलेगा
- तत्कालीन सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर जितेंद्र राठौड़
- असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर और जांच अधिकारी अर्चना पुजारी
- पुलिस सब-इंस्पेक्टर शत्रुघ्न तोडसे
- हेड कॉन्स्टेबल सुरेश माने
- हेड कॉन्स्टेबल विकास सूर्यवंशी
- हेड कॉन्स्टेबल सत्यजीत कांबले
- हेड कॉन्स्टेबल तुषार खैरना
- (आठवें अधिकारी का नाम रिपोर्ट में शामिल)
ये सभी 2014 में उस वक्त सक्रिय ड्यूटी पर थे जब यह घटना हुई।
मामला कैसे पहुंचा हाई कोर्ट तक?
इस मामले में पहले दो विरोधाभासी फैसले आए थे, जिसके बाद इसे खंडपीठ को रेफर किया गया। 2014 में ही कोर्ट के आदेश पर जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। अब 12 साल बाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि इस मामले में हत्या के आरोप तय किए जा सकते हैं।
कोर्ट ने कहा कि घटनाक्रम में कई संदिग्ध बातें हैं। युवक को अलग-अलग थानों में ले जाना, मेडिकल रिपोर्ट की विसंगतियां और गवाहों को धमकाना- ये सब कस्टोडियल डेथ की गंभीरता को दर्शाते हैं।
कस्टोडियल डेथ: भारत में एक काला अध्याय
यह मामला भारत में पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों की लंबी फेहरिस्त को एक बार फिर याद दिलाता है। आंकड़ों के अनुसार हर साल देशभर में दर्जनों कस्टोडियल डेथ के मामले सामने आते हैं, लेकिन बहुत कम मामलों में ही पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होती है।
बॉम्बे हाई कोर्ट का यह फैसला उन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है जिनके loved ones कस्टडी में खो चुके हैं। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी लोगों की सुरक्षा करना है, उन्हें यातना देना नहीं।
एग्नेलो वाल्डारिस की मौत के 12 साल बाद भी उसके परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। अब देखना होगा कि ट्रायल कोर्ट में यह केस किस दिशा में जाता है। क्या 8 पुलिस अधिकारी सजा से बच पाएंगे या न्याय का चक्र अंततः घूमेगा?
रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

