लखनऊ: पत्रकार ममता त्रिपाठी के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दर्ज मुकदमे के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को जमकर लताड़ लगाते हुए सवाल उठाया कि “पत्रकार पर स्टोरी लिखने के लिए धारा 420 कैसे और क्यों लगाई गई?” यह मामला सितंबर 2023 में लखनऊ के हजरतगंज थाने में दर्ज FIR से जुड़ा है, जिसके खिलाफ ममता त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार और राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा है। ममता त्रिपाठी पर यह FIR कथित तौर पर एक स्टोरी लिखने के कारण दर्ज की गई थी, जिसमें उन्होंने राज्य प्रशासन में कथित अनियमितताओं और पक्षपात को उजागर किया था। कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि पत्रकारिता के काम को आपराधिक मामला बनाकर प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला किया जा रहा है।
ममता त्रिपाठी ने अपनी याचिका में दावा किया था कि उनके खिलाफ दर्ज चार FIRs राजनीति से प्रेरित हैं और इनका मकसद उनकी आवाज को दबाना है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में त्रिपाठी को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए उनके खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
यह घटना उस समय की है जब सितंबर 2023 में लखनऊ के हजरतगंज थाने में उनके खिलाफ धारा 420 (धोखाधड़ी) सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। ममता त्रिपाठी ने इसे प्रेस की आजादी पर हमला करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। अब कोर्ट के इस फैसले से पत्रकारिता जगत में इसे एक बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी और कार्रवाई पत्रकारों के अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी, जब उत्तर प्रदेश सरकार को अपना जवाब पेश करना होगा।
रिपोर्ट :सुरेंद्र