
हैदराबाद: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार रात लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 का कड़ा विरोध जताया। विधेयक पर चर्चा के दौरान उन्होंने इसके मसौदे की कॉपी को फाड़ दिया और इसे भारत के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय पर हमला करार दिया। ओवैसी ने अपने भाषण में कहा, “यह विधेयक देश के ईमान पर हमला है। इसे मुसलमानों को अपमानित करने और उनकी धार्मिक स्वतंत्रता छीनने के लिए लाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बिल के जरिए मुसलमानों के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया है।”
उन्होंने विधेयक को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 का उल्लंघन करता है। ओवैसी ने अपने तीखे हमले में यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस कानून के जरिए मस्जिदों, दरगाहों और मदरसों को निशाना बना रही है। विधेयक की कॉपी फाड़ते हुए उन्होंने महात्मा गांधी का हवाला दिया और कहा, “जैसे गांधीजी ने अन्याय के खिलाफ कानून फाड़ा था, वैसे ही मैं इस बिल को फाड़ता हूं।”
इस घटना के बाद एआईएमआईएम दिल्ली के अध्यक्ष शोएब जमई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर ओवैसी के भाषण का वीडियो शेयर करते हुए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “एक अकेला ही बुजदिलों की भीड़ के लिए काफी है। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी साहब ने वक्फ बिल के खिलाफ विरोध दर्ज करने के लिए संसद में इसके मसौदे को फाड़ दिया। याद रखें, उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के बिल को भी संसद में फाड़ा था।”
शोएब जमई ने आगे कहा कि अगर यह विधेयक मुसलमानों पर जबरन थोपा गया तो इसके खिलाफ देशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी शुरुआत दिल्ली से होगी। ओवैसी के इस कदम की सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा हो रही है, जहां उनके समर्थक इसे साहसिक कदम बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे संसदीय मर्यादा का उल्लंघन करार दे रहे हैं।
लोकसभा में लगभग 12 घंटे की लंबी बहस के बाद वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को देर रात पारित कर दिया गया। अब इसे गुरुवार, 3 अप्रैल, 2025 को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता लाना और इसमें महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना बताया जा रहा है, लेकिन विपक्ष इसे मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर हमला बता रहा है।
रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार
