मुंबई/बारामती, 31 जनवरी 2026 — अजीत पवार के निधन के मात्र तीन दिन बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को एनसीपी (अजित गुट) की विधायक दल की नेता चुना गया है। आज दोपहर मुंबई में एनसीपी की विधायक दल की बैठक में उन्हें विधानमंडल दल का नेता घोषित किया गया, और शाम को राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह होने की संभावना है। इससे सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनेंगी।
यह फैसला अजीत पवार के निधन से पैदा हुए लीडरशिप वैक्यूम को भरने के लिए लिया गया है। वरिष्ठ नेता छगन भुजबल, प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे सहित पार्टी के कई बड़े चेहरे सुनेत्रा के पक्ष में थे। उन्होंने अजीत गुट की 41 विधायकों वाली ताकत को बनाए रखने और परिवार की राजनीतिक विरासत को बचाने पर जोर दिया। सुनेत्रा, जो राज्यसभा सांसद हैं, को अजीत पवार के प्रमुख पोर्टफोलियो जैसे वित्त, उत्पाद शुल्क और खेल विभाग मिलने की उम्मीद है, हालांकि कैबिनेट में रीशफल की बात चल रही है।
एनसीपी में बंटवारा और मर्जर की अटकलें जारी
अजीत पवार के जाने के बाद पार्टी में दो गुट साफ दिख रहे हैं:
- एक धड़ा (भुजबल, पटेल समर्थक) महायुति गठबंधन (भाजपा-शिवसेना) के साथ बने रहना चाहता है और सुनेत्रा को कमान देकर स्थिरता बनाए रखना चाहता है।
- दूसरा धड़ा अनुभवी नेताओं (जैसे सुनील तटकरे कैंप) की ओर झुका दिख रहा है, जो पार्टी को मजबूत बनाने के लिए अलग लीडरशिप की बात करता है।
हालांकि, अजीत पवार की मौत से पहले दोनों एनसीपी गुटों (अजित और शरद पवार) के बीच मर्जर की बातें तेज थीं। सूत्रों के मुताबिक, फरवरी 2026 में औपचारिक मर्जर होने वाला था, और पुणे-पिंपरी चिंचवड़ चुनावों में दोनों ने साथ लड़ा था। अब कुछ नेता इसे अजीत की “आखिरी इच्छा” बताकर मर्जर को तेज करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सुनेत्रा की नियुक्ति से महायुति में बने रहने की संभावना मजबूत हुई है। मर्जर की अटकलें फिलहाल अनिश्चित हैं।
जांच जारी, राजनीतिक उथल-पुथल का दौर
28 जनवरी को बारामती एयरपोर्ट पर हुए विमान हादसे (Learjet 45XR, VT-SSK) की जांच AAIB और CID द्वारा तेजी से चल रही है। ब्लैक बॉक्स बरामद हो चुका है, और कारणों में लॉस ऑफ कंट्रोल या पायलट एरर की बात हो रही है। कुछ विपक्षी नेताओं ने साजिश की आशंका जताई है, लेकिन आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं हुई।
यह घटना महाराष्ट्र की सियासत में लंबे समय तक असर डालेगी। सुनेत्रा पवार की एंट्री से परिवार का कंट्रोल बरकरार रह सकता है, लेकिन पार्टी के भविष्य और महायुति गठबंधन की स्थिरता पर सवाल बने हुए हैं। अगले कुछ दिनों में मर्जर या और बंटवारे की संभावना से राजनीतिक भूचाल जारी रह सकता है।
यह दुखद घटना न केवल एक बड़े नेता के जाने की है, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत भी है।
रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

