जयपुर: राजस्थान कैडर के सीनियर आईपीएस अधिकारी किशन सहाय मीणा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। वर्तमान में पुलिस मुख्यालय में आईजी (मानवाधिकार प्रकोष्ठ) के पद पर तैनात मीणा अपनी कार्यशैली के साथ-साथ अपने ‘विज्ञानवाद’ के विचारों और हाल ही में लगे गंभीर आरोपों के कारण विवादों के केंद्र में आ गए हैं।
सोशल मीडिया पर विज्ञानवाद का शंखनाद
आईपीएस किशन सहाय मीणा सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं और लंबे समय से ‘विज्ञानवाद’ का प्रचार कर रहे हैं। उनका मानना है कि धर्म और भगवान के भरोसे तरक्की संभव नहीं है। मीणा ने अपने पोस्ट के जरिए स्पष्ट संदेश दिया है कि:
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण: भारत का ‘सुपर पावर’ बनने का सपना केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने से ही साकार हो सकता है।
- अंधविश्वास का खंडन: उन्होंने भगवान, अल्लाह, गॉड और स्वर्ग-नरक जैसी धारणाओं को मनगढ़ंत और कल्पना मात्र बताया है।
- प्रगति का मार्ग: उनके अनुसार, धार्मिक अंधविश्वास समाज को भटकाने वाला मार्ग है, जिसे त्याग कर ही देश प्रगति कर सकता है।
दुष्कर्म और मारपीट के आरोपों से घिरे

विवादों के बीच, जयपुर के मालवीय नगर थाने में एक 53 वर्षीय महिला ने आईपीएस मीणा के खिलाफ दुष्कर्म, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने की एफआईआर दर्ज कराई है। महिला का आरोप है कि मीणा ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और बाद में मुकरने पर उसके साथ मारपीट की।
साजिश का दावा और पूर्व का निलंबन
इन आरोपों पर सफाई देते हुए आईपीएस मीणा ने इसे एक गहरी साजिश बताया है। उनका कहना है कि:
“मैं पिछले 10 साल से विज्ञानवाद का प्रचार कर रहा हूँ। अंधविश्वास में डूबे लोग इसे हजम नहीं कर पा रहे हैं और मुझे बदनाम करने के लिए यह झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया है।”
गौरतलब है कि मीणा का विवादों से पुराना नाता रहा है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान झारखंड में ड्यूटी छोड़कर बिना सूचना जयपुर लौटने पर उन्हें सस्पेंड भी किया जा चुका है।
वर्तमान में जयपुर आयुक्तालय की एडिशनल डीसीपी जिज्ञासा इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘विज्ञानवाद’ की वकालत करने वाले इस अधिकारी पर लगे आरोपों की सच्चाई क्या निकलती है।
रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

