मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने निरस्त की मुन्नालाल तिवारी के खिलाफ एफआईआर
निवाड़ी (मध्य प्रदेश), : मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध राम राजा मंदिर (ओरछा) के दान और चढ़ावे घोटाले में नौ साल बाद बड़ा मोड़ आया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने तत्कालीन मंदिर लिपिक मुन्नालाल तिवारी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त कर दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि

ओरछा को बुंदेलखंड की दूसरी अयोध्या भी कहा जाता है। वर्ष 2017 में राम राजा मंदिर में दानराशि और आभूषणों में कथित अनियमितताओं की शिकायत तत्कालीन कलेक्टर प्रियंका दास के पास की गई थी। शिकायत के आधार पर एसडीएम जतारा आदित्य सिंह को जांच सौंपी गई।
जांच रिपोर्ट में 16 बिंदुओं पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में तत्कालीन तहसीलदार गुलाब सिंह बघेल की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए थे। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर 10 सितंबर 2017 को ओरछा थाने में मुन्नालाल तिवारी के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।
लिपिक को बनाया बलि का बकरा?
शिकायतकर्ता रामनरेश दास का कहना है कि मुन्नालाल तिवारी केवल लिपिकीय कार्य करते थे। वित्तीय और प्रशासनिक फैसले तहसीलदार व उच्च अधिकारियों के स्तर पर होते थे। तिवारी पक्ष का आरोप है कि असली जिम्मेदार अधिकारियों को बचाने के लिए एक साधारण लिपिक को बलि का बकरा बनाया गया।
वर्ष 2019 में लोकायुक्त संगठन की रिपोर्ट में भी तिवारी पर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया गया था।
पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता रामनरेश दास ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन ने शुरू से ही मामले की लीपापोती की। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक राय सिंह नरवरिया पर समय पर प्रभावी जांच न करने और हाईकोर्ट में जरूरी दस्तावेज न पेश करने का आरोप लगा है।
राजनीतिक बवाल
हाईकोर्ट के फैसले के बाद मामला राजनीतिक रंग ले चुका है।
कांग्रेस का हमला:
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ओरछा रामराजा मंदिर दान घोटाले की एसआईटी जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि अयोध्या राम मंदिर से जुड़े मामलों में विशेष तंत्र बनाया गया, तो ओरछा में भी एसआईटी गठित होनी चाहिए। पटवारी ने सवाल किया कि 9 साल बाद भी यह नहीं पता चल सका कि दानराशि में गड़बड़ी के लिए कौन जिम्मेदार है।
बीजेपी का पलटवार:
बीजेपी प्रवक्ता विवेक गुप्ता ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक तरफ भगवान राम पर सवाल उठाती है और दूसरी ओर राम के नाम पर राजनीति करती है। सरकार पूरे मामले को गंभीरता से देख रही है और जांच के आधार पर उचित कार्रवाई करेगी।
अब सवाल ये हैं…
- यदि अनियमितताएं हुई थीं तो असली जिम्मेदार कौन था?
- 9 साल तक जांच क्यों अधूरी रही?
- तहसीलदार गुलाब सिंह बघेल समेत अन्य अधिकारियों की भूमिका पर अब क्या कार्रवाई होगी?
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राम राजा मंदिर दान घोटाले की जांच एजेंसियों, प्रशासन और राजनीतिक दलों की भूमिका को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

