भारत के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने मंगलवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भेजी गई एक लोइटरिंग म्यूनिशन (सुसाइड ड्रोन) पाकिस्तान के सरगोधा के पास किराना हिल्स इलाके में गिरी होगी। यह इलाका पाकिस्तान की परमाणु सुविधाओं से जुड़ा माना जाता है।
आरएसएस से जुड़े थिंक टैंक विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए जनरल चौहान ने बताया कि हमलों से पहले रडार की तलाश के लिए सरगोधा के आसपास कई सुसाइड ड्रोन भेजे गए थे। इनकी उड़ान क्षमता करीब दो घंटे की थी। अगर इस दौरान कोई लक्ष्य नहीं मिला तो वे नीचे गिरकर कहीं टकरा जाते हैं। उन्होंने कहा, “वह आकर उन पहाड़ियों में से किसी एक से टकराया होगा।”

उन्होंने पाकिस्तानी मीडिया में दिखाए गए धुएं वाली तस्वीरों का भी जिक्र किया।
पिछले साल 12 मई को एयर मार्शल ए.के. भारती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा था कि भारतीय बलों ने किराना हिल्स के परमाणु प्रतिष्ठान को निशाना नहीं बनाया। उन्होंने कहा था, “हमें इसके बारे में जानकारी नहीं थी। हमने किराना हिल्स पर हमला नहीं किया है।”
विशेषज्ञों का सवाल: 15 महीने बाद क्यों?

ऑपरेशन सिंदूर के 15 महीने बाद इस ‘सफाई’ पर कई विशेषज्ञ हैरान हैं।
कार्नेगी एंडowment के सीनियर फेलो अंकित पांडा ने लिखा कि यह टिप्पणी मई 2025 के भारत-पाक संकट के एक अनसुलझे पहलू पर कुछ स्पष्टता देती है। उनका मानना है कि अगर ऐसा हुआ तो यह अनजाने में हुआ होगा, लेकिन यह परमाणु संघर्ष के जोखिम को दिखाता है।
सामरिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने कहा कि जनरल चौहान ने किराना हिल्स पर असर को जानबूझकर हमले के बजाय ड्रोन की तकनीकी सीमा से जोड़ा। इससे भारत का रुख मजबूत होता है कि निशाना सिर्फ आतंकी और पारंपरिक सैन्य ठिकाने थे।

रक्षा विश्लेषक राहुल बेदी ने बीबीसी हिंदी से कहा, “मुझे नहीं लगता इससे भारत की छवि मजबूत होगी। यह बात आरएसएस से जुड़े थिंक टैंक में कही गई है। जाहिर है डोमेस्टिक कंजंप्शन के लिए है। इससे लगता है सेना का राजनीतिकरण हो रहा है।” बेदी के मुताबिक जनरल चौहान आम लोगों को संदेश देना चाहते थे कि भारत पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों तक पहुंच रखता है, लेकिन जानबूझकर छोड़ दिया।
जेएनयू के एसोसिएट प्रोफेसर लक्ष्मण कुमार ने कहा, “रिटायरमेंट के बाद ऐसी बातें होती हैं, लेकिन तत्कालीन सीडीएस होने के नाते थोड़ी हैरानी होती है। शायद संदेश है कि भारत जिम्मेदार देश है और पहुंच के बावजूद परमाणु ठिकानों को निशाना नहीं बनाया।”

जनरल चौहान ने कार्यक्रम में यह भी कहा कि ऑपरेशन की सफलता सेना, नौसेना और वायुसेना के बेहतर समन्वय तथा स्पष्ट राजनीतिक दिशा के कारण मिली। उन्होंने ट्रंप के युद्धविराम मध्यस्थता के दावों को खारिज करते हुए कहा कि फैसला दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच हुआ था।
रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

