नई दिल्ली: भारत में चल रहे इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक रोबोटिक डॉग को “ओरियन” नाम से प्रदर्शित किया और दावा किया कि यह उनकी यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा विकसित की गई इन-हाउस तकनीक है। लेकिन सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद पता चला कि यह रोबोट चीन की कंपनी Unitree Robotics का Go2 मॉडल है, जो बाजार में 2 से 3 लाख रुपये में उपलब्ध है।

समिट का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 फरवरी को किया था। दूसरे दिन 17 फरवरी को यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह ने DD न्यूज को दिए इंटरव्यू में रोबोट को यूनिवर्सिटी की डेवलपमेंट बताया। इस पर टेक एक्सपर्ट्स और यूजर्स ने सवाल उठाए। विवाद बढ़ने के बाद सरकार के सूत्रों के अनुसार, यूनिवर्सिटी को एक्सपो स्पेस से स्टॉल खाली करने के निर्देश दिए गए। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि स्टॉल की बिजली भी काट दी गई।
गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने सफाई दी है कि उन्होंने कभी रोबोट बनाने का दावा नहीं किया। उनका कहना है कि यह रोबोट छात्रों को ट्रेनिंग और रिसर्च के लिए खरीदा गया था, और प्रतिनिधि की तरफ से गलत बयान “स्लिप ऑफ टंग” था। यूनिवर्सिटी ने माफी मांगी और कहा कि उनका उद्देश्य छात्रों को ग्लोबल टेक्नोलॉजी से रूबरू कराना है, ताकि वे भविष्य में ऐसी चीजें खुद बना सकें।

विपक्ष ने इसे सरकार पर हमला करने का मौका बनाया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने X पर पोस्ट कर समिट को “डिसऑर्गेनाइज्ड PR स्पेक्टेकल” बताया। उन्होंने लिखा, “भारत की प्रतिभा और डेटा का इस्तेमाल करने के बजाय, एआई समिट अव्यवस्थित पीआर तमाशा बन गया है – भारतीय डेटा बिक्री के लिए उपलब्ध, चीनी उत्पाद प्रदर्शित।” कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने देश की छवि को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है और AI सेक्टर में भारत को मजाक बनाया है।
आईटी सेक्रेटरी एस. कृष्णन ने कहा कि एक्जिबिटर्स को ऐसी चीजें नहीं दिखानी चाहिए जो उनकी नहीं हैं, और विवाद से बचना चाहिए। यह घटना समिट की छवि पर असर डाल रही है, जो भारत की AI क्षमताओं को प्रमोट करने के लिए आयोजित की गई थी।
यह मामला पारदर्शिता, इनोवेशन के दावों और इवेंट्स में सही जानकारी देने की जरूरत पर सवाल खड़ा करता है। फिलहाल समिट जारी है, लेकिन इस विवाद ने चर्चा बंटा दी है।
Repoter: Surendra kumar

