हैदराबाद के दंपत्ति ने पालतू कुत्ते को परिवार का हिस्सा मानकर दिखाया प्यार, ऑस्ट्रेलिया ले जाने में खर्च किए 15 लाख रुपये

हैदराबाद/ऑस्ट्रेलिया, 31 जनवरी 2026 — पालतू जानवरों के प्रति सच्चा प्यार क्या होता है, यह साबित कर दिया है हैदराबाद के एक दंपत्ति ने। जब उन्हें ऑस्ट्रेलिया जाने का मौका मिला, तो उन्होंने अपने प्यारे कुत्ते ‘स्काई’ (Sky) को पीछे छोड़ने से साफ इनकार कर दिया। ऑस्ट्रेलिया की सख्त बायोसिक्योरिटी नियमों के कारण भारत से कुत्तों को सीधे एंट्री नहीं मिलती—उन्हें पहले किसी रेबीज-फ्री देश में कम से कम 6 महीने (180 दिन) क्वारंटाइन में रहना पड़ता है, साथ ही वैक्सीनेशन, टेस्ट और पेपरवर्क की पूरी प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

इस दंपत्ति—दिव्या और जॉन—ने इस चुनौती को स्वीकार किया। उन्होंने अपने कुत्ते के साथ 6 महीने अलग रहने का दर्द सहा, दुबई जैसे रेबीज-फ्री देश में कुछ समय बिताया, और कुल मिलाकर लगभग 14 से 16 लाख रुपये (करीब 15 लाख) खर्च किए। इसमें यात्रा, क्वारंटाइन, वेट डॉक्टर फीस, फ्लाइट चार्जेस और सभी कानूनी प्रक्रियाएं शामिल थीं।

एक वायरल इंस्टाग्राम वीडियो (अकाउंट ‘Kahaani of Tales’ द्वारा शेयर) में इस पूरी कहानी को भावुक तरीके से दिखाया गया है। वीडियो में लिखा है: “Why spend 15 lakhs on a dog? Get a new one.” लेकिन दंपत्ति का जवाब साफ था—“He’s our child” (वह हमारा बच्चा है)। उन्होंने कहा, “Money is replaceable, love isn’t” (पैसे की जगह मिल सकती है, प्यार की नहीं)।

कपल ने बताया कि वे साधारण परिवार से हैं और हर पैसा बचाकर यह सपना पूरा किया। स्काई के साथ 190 दिनों की जुदाई के बाद जब वे ऑस्ट्रेलिया में फिर मिले, तो आंसुओं और खुशी का मेल था। सोशल मीडिया पर यह कहानी तेजी से वायरल हो रही है—लोग इसे ‘ट्रू लव’ और ‘फैमिली बॉन्ड’ का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं।

कई यूजर्स ने कमेंट किया:

  • “अगर कुत्ता साथ न जा सके तो मैं नहीं जाऊंगा!”
  • “यह असली प्यार है, पैसों से ऊपर।”
  • कुछ ने कहा कि कनाडा जैसे देशों में प्रक्रिया आसान और सस्ती होती है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के नियम बहुत सख्त हैं।

यह घटना पालतू जानवरों को परिवार का हिस्सा मानने वाले लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है। हैदराबाद से ऑस्ट्रेलिया तक की यह यात्रा सिर्फ माइल्स की नहीं, बल्कि भावनाओं और समर्पण की है। ❤️🐶

रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

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