77वें गणतंत्र दिवस पर भारत की सशक्त छवि और संकल्प की अभिव्यक्ति

आज, 26 जनवरी 2026 को, जब पूरा राष्ट्र 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर एकजुट होकर उत्सव मना रहा है, तो यह मात्र एक औपचारिक समारोह नहीं, बल्कि एक गहन संदेश है—भारत अब केवल अपनी सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का जश्न नहीं मना रहा, अपितु अपनी सैन्य क्षमता, संकल्प और आत्मनिर्भरता की नई ऊँचाइयों को भी विश्व पटल पर प्रदर्शित कर रहा है। ‘150 वर्ष वंदे मातरम’ की थीम के साथ यह गणतंत्र दिवस विशेष रूप से ऐतिहासिक है, क्योंकि यह पहली बार ऑपरेशन सिंदूर की विजय के बाद मनाया जा रहा है, और इसने परेड को एक नए आयाम से जोड़ दिया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पूर्व संध्या पर दिए गए संबोधन में उन्होंने सही कहा कि गणतंत्र दिवस हमें अतीत की सीख, वर्तमान की चुनौतियों और भविष्य की आकांक्षाओं का साक्षात्कार करने का अवसर प्रदान करता है। यह अवलोकन आज और भी प्रासंगिक हो जाता है, जब देश ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए अमानवीय नरसंहार—जिसमें 26 निर्दोष पर्यटकों की जान गई—के बाद निर्णायक कार्रवाई की। 7 से 10 मई 2025 तक चले ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सशस्त्र बलों ने जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के ठिकानों पर सटीक हमले किए, पाकिस्तानी सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया और एक स्पष्ट संदेश दिया कि आतंकवाद अब युद्ध का ही एक रूप है। इस ऑपरेशन ने न केवल भारत की सैन्य तैयारियों को सिद्ध किया, बल्कि ‘प्रोप्रोर्शनल रिस्पॉन्स’ और ‘जॉइंटनेस’ की नई सैन्य नीति को भी स्थापित किया।

कर्तव्य पथ पर आज जो परेड देखने को मिल रही है, वह पारंपरिक सेरेमोनियल प्रदर्शन से कहीं अधिक है। पहली बार भारतीय सेना ने ‘फेज्ड बैटल एरे’ (Phased Battle Array) फॉर्मेट अपनाया है, जिसमें थलसेना, वायुसेना और नौसेना के दस्ते युद्ध-क्षेत्र जैसी वास्तविक व्यूह-रचना में प्रस्तुत हो रहे हैं। भैरव लाइट कमांडो बटालियन, टैंक, तोपखाने, रॉकेट लॉन्चर, मिसाइल सिस्टम, ड्रोन वॉरफेयर यूनिट्स और एयर डिफेंस सिस्टम—सब कुछ युद्ध की तैयार मुद्रा में। घुड़सवार टुकड़ी भी पहली बार कॉम्बैट वेशभूषा में नजर आ रही है। यह परिवर्तन केवल दिखावा नहीं, बल्कि एक संदेश है—भारत अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक रणनीति के साथ तैयार है।

वायुसेना का फ्लाई-पास्ट इस समारोह का एक और गौरवपूर्ण अध्याय है। 29 विमानों में 16 लड़ाकू जेट—रफाल, सुखोई-30, मिग-29 और जगुआर—’सिंदूर फॉर्मेशन’ और ‘स्पीयरहेड फॉर्मेशन’ में उड़ान भर रहे हैं। ध्वज फॉर्मेशन में मी-17 हेलीकॉप्टर तिरंगा और तीनों सेनाओं के ध्वज लेकर आकाश में गरज रहे हैं, जबकि प्रहार फॉर्मेशन में एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर ऑपरेशन सिंदूर का प्रतीक झंडा लेकर उड़ान भर रहे हैं। रफाल का मुख्य आकर्षण बनना स्वाभाविक है, क्योंकि यही विमान ऑपरेशन सिंदूर में निर्णायक भूमिका निभा चुके हैं।

एक विशेष उल्लेखनीय क्षण है फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता धनखड़ का राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ ध्वजारोहण में शामिल होना। हरियाणा की इस वायुसेना अधिकारी की मौजूदगी न केवल महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है, बल्कि भारतीय सेना में नई पीढ़ी की भागीदारी और समावेशिता को भी रेखांकित करती है। वायुसेना के मार्चिंग दस्ते में 114 वायु योद्धाओं का नेतृत्व स्क्वाड्रन लीडर जगदेश कुमार कर रहे हैं, और मिलिट्री बैंड में पहली बार अग्निवीरों—पुरुष और महिला दोनों—की भागीदारी एक ऐतिहासिक कदम है।

यह गणतंत्र दिवस हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र केवल अधिकारों का नहीं, बल्कि कर्तव्यों का भी उत्सव है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद की यह पहली परेड सैन्य ताकत के साथ-साथ जन-भागीदारी, सांस्कृतिक विविधता और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को एक साथ प्रदर्शित कर रही है। 30 टेबल्यू, 2,500 कलाकारों का प्रदर्शन और आधुनिक हथियारों का भव्य मिश्रण—सब कुछ इस बात का प्रमाण है कि भारत अब न केवल सुरक्षित है, बल्कि विश्व मंच पर एक मजबूत, आत्मविश्वासी और निर्णायक शक्ति के रूप में उभर रहा है।

आज का दिन हमें गर्व के साथ-साथ सतर्कता का भी संदेश देता है—शांति की कामना करते हुए हम अपनी रक्षा के लिए सदैव तैयार रहेंगे। जय हिंद! जय भारत!

रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!