‘2 साल में खत्म होगी कुत्तों की समस्या’, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों पर मेनका गांधी का सख्त इंटरव्यू

नई दिल्ली। देश में बढ़ती डॉग बाइट घटनाओं और सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी ने साफ कहा है कि कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान उन्हें सड़कों से हटाने में नहीं, बल्कि एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) कार्यक्रम को ठीक से लागू करने में है।

मेनका गांधी ने कहा, “ठीक से ABC लागू करो, तो दो साल में कुत्तों के काटने की समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है।”

ABC कार्यक्रम की नाकामी क्यों?

मेनका गांधी ने सुनील डोगरा को दिए विशेष इंटरव्यू में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2001 में शुरू हुए नसबंदी कार्यक्रम को अगर पिछले 25 सालों में ईमानदारी और वैज्ञानिक तरीके से लागू किया गया होता तो आज स्थिति बिल्कुल अलग होती।

मुख्य आरोप:

  • नगर निगमों और नगरपालिकाओं पर जिम्मेदारी डालकर सरकार ने काम छोड़ दिया।
  • सीमित बजट और कमजोर निगरानी के कारण कार्यक्रम फेल हो गया।
  • कई जगहों पर फर्जी एनजीओ और भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से धोखाधड़ी हुई।
  • रिकॉर्ड में ज्यादा नसबंदी दिखाकर पैसे वसूले गए।
  • बिना डॉक्टर के, सफाई कर्मचारियों से ऑपरेशन कराए गए।
  • कुत्तों को उनकी मूल जगह पर छोड़ने के बजाय दूसरे इलाकों में छोड़ दिया गया, जिससे आक्रामकता बढ़ी।

कुत्तों को हटाना समाधान नहीं

सुप्रीम कोर्ट द्वारा रेलवे स्टेशन, अस्पताल, स्कूल आदि जगहों से कुत्तों हटाने के सुझाव पर मेनका गांधी ने सवाल उठाया — उन्हें कहां रखा जाएगा? दूसरे इलाकों में छोड़ने से गरीब आबादी सबसे ज्यादा प्रभावित होगी।

उन्होंने जोर दिया कि कुत्ते को उनकी जगह से उठाकर कहीं और छोड़ने से वे असुरक्षित महसूस करते हैं, जिससे उनके काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं।

समाधान का रोडमैप

मेनका गांधी ने सुझाया:

  1. एनिमल वेलफेयर बोर्ड को मजबूत किया जाए।
  2. ABC कार्यक्रम चलाने वाले सभी NGOs के लिए प्रशिक्षण अनिवार्य हो।
  3. सरकार निगरानी सख्त करे और नियमों का पालन सुनिश्चित करे।
  4. हर कॉलोनी में RWAs, नगर निगम और स्थानीय लोगों की सहमति से एक तय जगह कुत्तों को खाना खिलाने के लिए तय की जाए।

उनका दावा: अगर ये कदम उठाए गए तो दो साल के अंदर कुत्तों की समस्या में बड़ा सुधार दिखाई देगा।

आक्रामक कुत्तों की पहचान और विदेशी नस्लों पर सख्ती

सुप्रीम कोर्ट के आक्रामक कुत्तों (बिना उकसावे के तीन बार काटने वाले) को निगरानी में रखने के फैसले पर मेनका गांधी ने सहमति जताई, लेकिन चेतावनी दी कि कई जगहों पर ‘आक्रामक’ शब्द का दुरुपयोग हो रहा है।

विदेशी नस्लों पर:

  • भारत में बड़े और आक्रामक विदेशी नस्ल के कुत्ते नहीं होने चाहिए।
  • सरकार ने पहले 18 विदेशी नस्लों की बिक्री पर रोक लगाई थी, लेकिन कुछ राज्यों ने कोर्ट से रोक हटवा ली।
  • 2018 के पालतू जानवरों की दुकानों संबंधी आदेश पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

मेनका की सलाह: लोग इंडी (Indian Indigenous) कुत्तों को अपनाएं। उन्होंने बताया कि उनके पास भी केवल इंडी कुत्ते ही हैं।

अंतिम संदेश

जिन लोगों ने कुत्तों के काटने से अपने प्रियजनों को खोया है और जो पशु कल्याण के काम करते हैं, उनसे मेनका गांधी ने अपील की — “मानव सुरक्षा और पशु कल्याण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। स्थायी समाधान टकराव से नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और सहयोग से आएगा।”

मेनका गांधी का स्पष्ट संदेश है — समस्या कुत्तों की नहीं, बल्कि ABC कार्यक्रम की गलत और भ्रष्ट क्रियान्वयन की है। सही निगरानी और ईमानदारी से काम किया जाए तो दो साल में सड़कों पर शांति लाई जा सकती है।



रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

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