नई दिल्ली, 10 फरवरी 2026: संसद के बजट सत्र के बीच विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने मंगलवार को लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को अविश्वास प्रस्ताव लाने का नोटिस सौंपा, जिसमें ओम बिरला पर सदन संचालन में पक्षपात, विपक्षी सांसदों को बोलने से रोकने और पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया है।
यह नोटिस संविधान के अनुच्छेद 94 (C) के तहत दिया गया है। कांग्रेस सांसद कोडिकुनिल सुरेश, गौरव गोगोई और मोहम्मद जावेद ने इसे सौंपा। सूत्रों के अनुसार, इस पर 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए, जिसकी वजह कांग्रेस ने स्पष्ट की है।
विपक्ष के आरोप:
- लोकसभा की कार्यवाही में खुला पक्षपात।
- विपक्ष के नेता राहुल गांधी को 2 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान भाषण पूरा नहीं करने दिया गया।
- 3 फरवरी को 8 विपक्षी सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया।
- विपक्षी नेताओं को बार-बार बोलने से रोका जा रहा है, जो उनका लोकतांत्रिक अधिकार है।
ओम बिरला का पहला रिएक्शन:
नोटिस मिलने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने महासचिव उत्पल कुमार सिंह को निर्देश दिया है कि इस नोटिस की जांच करें और उचित कार्रवाई करें। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने सचिवालय को प्रक्रिया तेज करने का भी आदेश दिया है। बिरला ने खुद को सदन की कार्यवाही से अलग रखा है।

यह घटना लोकसभा में जारी गतिरोध को और तेज कर सकती है। इतिहास में स्पीकर के खिलाफ ऐसे प्रस्ताव पहले भी आए हैं, लेकिन कोई भी सफल नहीं हुआ। अब लोकसभा सचिवालय नोटिस की जांच करेगा और नियमों के अनुसार आगे की प्रक्रिया तय करेगा। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि नोटिस में तारीख संबंधी त्रुटि (2025 की जगह 2026) हो सकती है, जिस पर बीजेपी ने तंज कसा है।
विपक्ष का कहना है कि यह कदम स्पीकर की कथित पक्षपातपूर्ण भूमिका के खिलाफ है, जबकि सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक स्टंट बता रहा है। संसद की कार्यवाही पर इसका असर देखना बाकी है।
रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

