यूपी में शंकराचार्य vs योगी सरकार: ममता बनर्जी की तारीफ कर लखनऊ कूच का ऐलान, बीफ व्यापार पर साधा निशाना

वाराणसी: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की नीति के तहत सबसे ज्यादा बीफ का व्यापार और निर्यात हो रहा है, जबकि पश्चिम बंगाल में गौ हत्या और संबंधित गतिविधियां कम हैं। शंकराचार्य ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तारीफ करते हुए कहा कि वहां ऐसी स्थिति बेहतर है।

शंकराचार्य ने 1 मार्च को योगी सरकार को अंतिम अल्टीमेटम देने की घोषणा की है। यदि मांगें नहीं मानी गईं तो वे संतों-महंतों के साथ लखनऊ कूच (मार्च) करेंगे और बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित करेंगे। यह विवाद जनवरी 2026 में प्रयागराज के माघ मेले के दौरान शुरू हुआ था, जब शंकराचार्य और उनके शिष्यों (बटुकों) के साथ प्रशासन की ओर से कथित बदसलूकी और रोकटोक हुई थी। शंकराचार्य ने इसे सनातन धर्म का अपमान बताया और गौ माता को ‘राज्यमाता’ घोषित करने, बीफ निर्यात पर पूर्ण रोक लगाने की मांग की थी। उन्होंने पहले ही 40 दिनों का अल्टीमेटम दिया था, जो अब और तेज हो गया है।

ब्रजेश पाठक के बयान पर कटाक्ष
शंकराचार्य ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के हालिया बयान और बटुकों का सम्मान करने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह एक महीने चुप रहते हैं और अब हिचकी जैसी आवाज में बोलते हैं, शायद वोटरों या समाज का दबाव हो। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी को मारकर बाद में फूल चढ़ाना शांति कैसे ला सकता है, हालांकि उन्होंने इसे भावना दिखाने के रूप में भी देखा।

बाबा रामदेव की सलाह पर तंज
योग गुरु बाबा रामदेव की ‘मिलजुल कर रहने’ की सलाह पर शंकराचार्य ने कटाक्ष किया कि “कालनेमी से मिलकर रहना चाहिए”। यह योगी सरकार पर अप्रत्यक्ष निशाना माना जा रहा है, क्योंकि पहले विवाद में योगी को ‘कालनेमी’ जैसे तत्वों से जोड़ा गया था।

सरकार का पक्ष और बटुकों का समर्थन
उधर, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने प्रयागराज में बटुकों का सम्मान किया और उन्हें फूल भेंट कर स्वागत किया गया। बटुकों ने कहा कि पाठक ने उनकी आवाज उठाई और सनातन समाज के साथ अन्याय के मुद्दे पर खड़े हुए। योगी सरकार ने पहले विधानसभा में कहा था कि कानून सबके लिए बराबर है और शंकराचार्य पद के नियमों का पालन जरूरी है।

यह विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है, जिसमें सनातन धर्म, गौ रक्षा और प्रशासनिक कार्रवाई जैसे मुद्दे उभर रहे हैं। शंकराचार्य के लखनऊ कूच के ऐलान से यूपी की सियासत में हलचल मची हुई है।


रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

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