प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न (POCSO एक्ट के तहत दर्ज) मामले में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ी राहत दी है। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। फैसला आने तक शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई है।

कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अग्रिम जमानत याचिका के अंतिम निपटारे तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके सह-आरोपी शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई या गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। हालांकि, अदालत ने शर्त रखी है कि वे जांच में पूरा सहयोग करें और पुलिस द्वारा की जाने वाली पूछताछ में शामिल हों। जांच सामान्य रूप से जारी रहेगी।
यह मामला प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज है, जहां दो नाबालिगों के साथ कथित यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता आशुतोष पांडे उर्फ आशुतोष ब्रह्मचारी हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को पूरी तरह झूठा और बदनामी का प्रयास बताया है। उन्होंने कहा है कि वे सच्चाई साबित करने के लिए नार्को टेस्ट भी कराने को तैयार हैं।
सुनवाई के दौरान शंकराचार्य की ओर से वरिष्ठ वकील पीएन मिश्रा ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल और शिकायतकर्ता की ओर से वकील रीना सिंह ने दलीलें पेश कीं। कोर्ट ने राज्य सरकार और शिकायतकर्ता को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अग्रिम जमानत पर विस्तृत फैसला मार्च के तीसरे सप्ताह में आने की संभावना है.यह फैसला शंकराचार्य के समर्थकों के लिए राहत की बात है, जबकि जांच एजेंसी को सहयोग की शर्त के साथ आगे बढ़ने की छूट मिली है।
रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

