केंद्र सरकार द्वारा बच्चों के लिए उम्र के आधार पर सोशल मीडिया इस्तेमाल की सीमाएं जल्द लागु !पढ़िए

वर्तमान स्थिति (फरवरी 2026 तक):

  • आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 (जो पिछले हफ्ते पेश हुआ) ने सिफारिश की है कि केंद्र सरकार बच्चों के लिए उम्र के आधार पर सोशल मीडिया इस्तेमाल की सीमाएं तय करने पर विचार करे। यह डिजिटल एडिक्शन, मानसिक स्वास्थ्य, और हानिकारक कंटेंट के प्रभाव को कम करने के लिए है। हालांकि, आर्थिक सर्वेक्षण की सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं होतीं—ये सिर्फ नीति बनाने में मदद करती हैं।
  • आंध्र प्रदेश में TDP विधायक एलएसके देवरायलु ने प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया है, जिसमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बनाने/रखने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है। प्लेटफॉर्म्स (जैसे Meta, Google, X) को उम्र सत्यापन की जिम्मेदारी दी जाएगी। यह बिल अभी सरकारी नीति नहीं है और कानून बनने की संभावना कम है, लेकिन यह बहस को दिशा दे सकता है।
  • आंध्र प्रदेश सरकार ने वैश्विक नियमों का अध्ययन करने के लिए मंत्रियों का ग्रुप बनाया है और सोशल मीडिया कंपनियों को चर्चा के लिए बुलाया है।
  • अन्य राज्य जैसे गोवा और कर्नाटक भी इस पर विचार कर रहे हैं। गोवा के मंत्री ने कहा है कि वे जांच कर रहे हैं, जबकि कर्नाटक में डिजिटल डिटॉक्स जैसे कार्यक्रम चल रहे हैं।
  • केंद्र स्तर पर अभी कोई आधिकारिक बिल या कानून नहीं आया है, लेकिन बहस तेज है—खासकर बच्चों की मानसिक सेहत, साइबरबुलिंग, और एडिक्शन को देखते हुए।

चुनौतियां और विशेषज्ञों की राय:

  • लागू करना मुश्किल → उम्र सत्यापन (age verification) आसान नहीं है। बच्चे फेक डेटा या VPN इस्तेमाल कर बायपास कर सकते हैं। भारत में कई अकाउंट परिवार के सदस्यों से शेयर होते हैं, जिससे एक व्यक्ति-एक अकाउंट का फॉर्मूला काम नहीं करता।
  • कानूनी और तकनीकी मुद्दे → राज्य स्तर पर बैन लगाना जटिल हो सकता है क्योंकि इंटरनेट केंद्र का विषय है। आईपी एड्रेस से लोकेशन पता चलती है, लेकिन बॉर्डर एरिया में समस्या आ सकती है। कंपनियां अदालत में चुनौती दे सकती हैं।
  • माता-पिता की भूमिका → कई विशेषज्ञ (जैसे दिल्ली के जितेंद्र यादव का उदाहरण) कहते हैं कि समस्या जड़ में माता-पिता का बच्चों को समय न देना है। बैन से बच्चे नियम तोड़ने के रास्ते निकाल लेंगे।
  • कुछ कार्यकर्ता (जैसे इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन) कहते हैं कि पूरा बैन लड़कियों और कम आय वर्ग के बच्चों के लिए इंटरनेट एक्सेस को और सीमित कर सकता है, जो उनकी शिक्षा/स्किल डेवलपमेंट के लिए जरूरी है।

वैश्विक संदर्भ:

ऑस्ट्रेलिया पहला देश है जहां यह बैन लागू हो चुका है। फ्रांस, ब्रिटेन, स्पेन जैसे देश भी विचार कर रहे हैं। भारत में अगर लागू हुआ तो यह दुनिया का सबसे बड़ा यूजर बेस (Meta, YouTube आदि) वाला देश होगा जहां ऐसा होगा।

संक्षेप में, पाबंदी लगने की संभावना है (खासकर उम्र सत्यापन और सीमित एक्सेस के रूप में), लेकिन अभी यह सिर्फ बहस और सिफारिशों तक सीमित है। केंद्र सरकार के अगले कदम पर निर्भर करेगा। माता-पिता को फिलहाल बच्चों की स्क्रीन टाइम मॉनिटरिंग, पैरेंटल कंट्रोल ऐप्स, और ओपन बातचीत पर फोकस करना चाहिए।

रिपोर्ट :सुरेंद्र कुमार

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